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हिमाचल

दुनिया के अनेक रूप

June 27, 2019 01:15 PM

 

मित्रो हमारी दुनिया यही नहीं जिसमे हम जी रहे होते हैं बल्कि इससे भी परे हमारी अपनी अलग -अलग दुनिया होती है, जिससे हमारी मानसिक दुनिया आती हैं। मानसिक दुनिया से तातपर्य प्रत्येक मनुष्य के मस्तिष्क में अपनी एक अलग दुनिया होती है। जिसमें उसकी कल्पनायें, सपने, विचार, भावनाएं होती है, और जैसी उसकी विचार भावनाएं, कल्पनाएँ होगी उसी तरह के विचार, भाव, व कल्पनाओं वाले व्यक्तियों को वह आकर्षित करता है। उसी के अनुरूप उसकी दुनिया बन जाती है। यह तो उसका मेन्टल वर्ल्ड रहा अब साइकोलॉजिकल वर्ल्ड से तातपर्य मनुष्य जो सोचता है , जो वह करता है, जिस और उसका ध्यान होता है , उसके जीवन में घटित भी वही होता है। अब आप पर निर्भर करता है की आप सफलता, खुशी, दौलत, सेहत के बारे में ध्यान केंद्रित करते है या फिर अपनी कमियों का, असफलता व कमजोरियों का ही रोना रोतें रहें। यह प्रकृति ने आप पर छोड़ दिया है की आप कैसी जिंदगी जिन चाहते है। तीसरी दुनिया है वरचुअली वर्ल्ड। इसमे वो लोग आते है जो सोशल साइट्स के पचासो पेजो में छाये रहते है, इसमे फेसबुक, व्हट्सऐप, लिंक्ड आदि है इनकी अपनी अलग दुनिया है जहां आपके सामने कुछ नहीं पर सब कुछ दूर से ही सूक्ष्म रूप में हो रहा है। इन्ही सूक्ष्मातिसूक्ष्म मयावी पोर्टलों में कई प्रतिभावान युवा कीड़ो की तरह डूबे रहते हैं और ये इतने वयस्त रहते है की स्वयं के अस्तित्व तक भूल जाते हैं की मैं कहाँ पर खड़ा हूँ। बस चलते फिरते खाते पीते, सोते जागते, बस कुछ न कुछ पोस्ट, शेयर , लाइक, कॉमेंट करते रहते है। इतनी हद कर देते है कि आम जिंदगी और व्यवहारिक जीवनशैली से इनका नाता नाममात्र का रह जाता है। मेरा मकसद इनकी कमजोरियों और बुराइयां निकालना नहीं, पर अपनी जिंदगी का भी तो कोई मकसद होगा। भगवान ने ऐसे ही थोड़ा भेजा होगा इस धरती पर कि जा बेटा तू चोबीसो घंटे फेसबुक चलाते रहना। इस जिंदगी का भी तो कोई लक्ष्य् है। अपना समग्र विकास भी तो करना है। यह जीवन तो पल -पल बीत ही रहा है, पर कुछ अच्छा करते हुए बीते तो क्या कहना। जिससे आत्म सन्तुष्टी मिले, आत्मा आशीर्वाद दे। जीवन की यथार्थता समझ में आये तो मज्जा आएगा।

कुछ पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान पा लेना तो भौतिक जीवन का उदेस्य है पर जीवन का वास्तविक लक्ष्य् तो आत्म चेतना का परमात्मा चेतना के साथ तादात्म्य है! जहाँ भेद भाव मिट जाते हैं, और तब बचती है , एक ही सत्ता जिसे सत् तत्व कहतें है या वेदो का ऋत तत्व कहते हैं।

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