एक तरफ हिमाचल प्रदेश आर्थिक तंगहाली से जूझ रहा है, सरकारी खजाना खाली है, और कर्ज़ का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ माननीयों की सैलरी और भत्तों में लाखों रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। शुक्रवार को विधानसभा में मंत्रियों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन-भत्तों में इज़ाफे के तीन संशोधन विधेयक पारित कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन तक देने में दिक्कतें आ रही हैं। जब से कांग्रेस सरकार बनी है तब से पक्ष - विपक्ष दोनों ही आर्थिक बदहाली का रोना रो रहें थे लेकिन बजट सत्र के आखिरी दिन स्वहित के लिए प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को दरकिनार करके वेतन भत्तों में वृद्धि के तीन संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित किए। जानिए सीएम समेत विधायकों की कितनी है सैलरी -
शिमला: (HD News); आर्थिक तंगी से जूझ रही सुख की सरकार में हिमाचल प्रदेश के माननीय मालामाल हो गए हैं। हिमाचल में विधायकों और मंत्रियों के वेतन और भत्तों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसको लेकर शुक्रवार को सदन में लाया गया मंत्रियों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन-भत्ते और पेंशन को को लेकर आए गए तीन संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गए हैं।
इससे पहले पूर्व की वीरभद्र सिंह की सरकार के समय में वर्ष 2016 में माननीयों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की गई थी। ऐसे में प्रदेश में करीब 9 साल बाद माननीयों के वेतन और भत्तों में वृद्धि हुई है। वेतन और और भत्तों में करीब 25 से 30 हजार की बढ़ोतरी से हुई है। हालांकि, वेतन और भत्तों में हुई वृद्धि के साथ प्रदेश सरकार ने विधायकों का 20 हजार रुपये टेलीफोन भत्ता सहित बिजली व पानी बिल भत्ते को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सदन में विधायकों के तीन भत्ते खत्म करने की घोषणा की।
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वहीं, सीएम सुक्खू ने कहा कि भविष्य में अब विधायकों का वेतन प्राइस इंडेक्स के अनुसार बढ़ाया जाएगा। इसके बाद अब विधायकों के सैलरी और भत्ते 1 अप्रैल 2030 फिर बढ़ेंगे. विधायकों को अब केवल विधानसभा क्षेत्र व कार्यालय भत्ते ही मिलेंगे। प्रदेश पूर्व विधायकों का टेलीफोन भत्ता भी खत्म किया गया।
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हिमाचल में अब विधायकों को 70 हजार रुपए मासिक वेतन मिलेगा, जो पहले 55 हजार रुपए मासिक था। ऐसे में विधायकों के वेतन 15 हजार की वृद्धि हुई है। वहीं, दैनिक भत्ते को भी 1800 से बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिदिन किया गया है। इसके अतिरिक्त निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को 90 हजार से बढ़ाकर 1.20 लाख तक बढ़ाया गया हैं। वहीं, ऑफिस भत्ते को 30 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। इस तरह से अब विधायकों को हर महीने 2.80 लाख वेतन और भत्ते मिलेंगे, जो पहले 2.10 लाख प्रति माह थे।
सीएम और मंत्रियों के वेतन-भत्तों में वृद्धि
हिमाचल में मंत्रियों के वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक भी पारित हो गया है. प्रदेश में अब मुख्यमंत्री के मासिक वेतन में 20 हजार की वृद्धि हुई है। सीएम का वेतन अब 95 रुपये से बढ़ाकर 1.15 लाख रुपये मासिक किया गया, इस तरह से सीएम को अब 3.40 लाख का वेतन और भत्ता प्रतिमाह मिलेगा, जो पहले 2.65 लाख प्रतिमाह था. वहीं, कैबिनेट मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष के वेतन में भी 15 हजार मासिक की बढ़ोतरी हुई है। अब मंत्रियों और विधानसभा स्पीकर का वेतन 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 95 हजार किया गया है।
इसके अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष के मासिक वेतन 75 हजार से बढ़ाकर 92 हजार प्रतिमाह किया गया है। विधानसभा उपाध्यक्ष के मासिक वेतन में 17 हजार की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इसी तरह से सत्कार भत्ते को 95 हजार से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये किया गया है। ऐसे में अब मंत्रियों को 3.30 लाख वेतन और भत्ता मिलेगा, जो पहले 2.55 लाख प्रति माह था।
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'महंगाई के हिसाब से पहले बढ़ जाने चाहिए थे वेतन और भत्ते'
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन विधेयकों पर हुई चर्चा में जवाब दिया। सीएम सुक्खू ने कहा, "आज पारित विधेयकों के बाद सरकार ने टेलीफोन, बिजली और पानी के बिलों के लिए दिए जाने वाले भत्तों को खत्म कर दिया है। यही नहीं, पूर्व विधायकों को दिए जाने वाले टेलीफोन भत्ते को भी खत्म कर दिया गया है।
अब विधायकों को केवल विधानसभा क्षेत्र भत्ता और कार्यालय भत्ता ही मिलेगा। विधायकों, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री का वेतन महंगाई के अनुसार काफी पहले बढ़ जाना चाहिए था। उनके पास विधायक आए और उन्होंने अपनी पीड़ा बताई। इसके बाद उन्होंने विधायकों की पीड़ा समझते हुए उनके वेतन-भत्ते बढ़ाने का फैसला किया"।
'वेतन ही विधायकों की आय का एकमात्र साधन'
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि हिमाचल में वेतन ही विधायकों की आय का एकमात्र साधन है, ऐसे में उनका वेतन बढ़ना जरूरी है। जिम्मेदारी के हिसाब से विधायकों का वेतन अधिक नहीं है।
वेतन में जरूरी थी बढ़ोतरी: जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि विधायकों से लोगों की उम्मीदें बहुत अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे में उनके वेतन में बढ़ोतरी बहुत जरूरी थी। विधायक संजय अवस्थी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायकों को जिंदा रखने के लिए उनके वेतन, भत्तों और पेंशन में बढ़ोतरी जरूरी है।
डॉ. हंसराज ने वेतन बढ़ोतरी का समर्थन करते हुए कहा कि विधायकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर इस वेतन बढ़ोतरी के खिलाफ बहुत कुछ चल रहा है, लेकिन इससे हम लोगों को फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि हम अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति जवाबदेह है।
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि विधायकों के खर्चे बहुत बढ़ गए। इसलिए वेतन वृद्धि बहुत जरूरी है। विधायक विनोद कुमार ने वेतन वृद्धि का समर्थन करते हुए कहा कि विधायकों को वाहनों पर झंडा लगाने की इजाजत भी मिलनी चाहिए।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि या तो विधायकों को भी वाहनों पर झंडी दी जाए, या फिर प्रोटोकॉल में उनके बराबर या उनसे नीचे के अधिकारियों की झंडी को उतारा जाए। (बिल्कुल सही कहा: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री और न्यायधीशों के इलावा किसी को भी झंडा लगाने की इजाजत नही होनी चाहिए..)
संजय रतन ने कहा कि विधायकों की सुविधा के लिए यह मुख्यमंत्री द्वारा सराहनीय कदम उठाया गया है। इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि आलोचना तो होती ही रहती है, राजनीति में इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए।
इंद्र सिंह गांधी ने कहा कि सरकार को विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने के साथ-साथ कर्मचारियों का वेतन आयोग का बकाया एरियर भी जारी कर देना चाहिए, राकेश कालिया ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए वेतन भत्तों में वृद्धि जरूरी थी।

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