राजधानी शिमला में ढली-कैथलीघाट फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत बन रही 'ट्वीन टनल' ने इसके ऊपर बसे सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है। टनल निर्माण के चलते शांति विहार और आसपास के कई मकानों में गहरी दरारें आने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों के भारी विरोध और दहशत को देखते हुए जहां एक ओर निर्माण कार्य पूरी तरह से रोक दिया गया है, वहीं बैकफुट पर आई एनएचएआई (NHAI) ने अब टनल की जद में आने वाले करीब 500 मकानों का 'बिल्डिंग कंडीशन सर्वे' और वीडियोग्राफी करवाने का फैसला लिया है। दूसरी तरफ, अपने जीवन भर की पूंजी को दरकता देख प्रभावित भवन मालिक अब पुराने सर्वे के आधार पर फोरलेन बनाने की मांग पर अड़ गए हैं, जिसका समाधान निकालने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ उनकी अहम बैठक होने जा रही है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ढली-कैथलीघाट फोरलेन परियोजना के तहत भट्ठाकुफर से चलौंठी तक 2.712 किलोमीटर लंबी 'ट्वीन टनल' का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से करीब 700 मीटर का काम पूरा हो चुका है। इस समानांतर टनल के ऊपर भट्ठाकुफर से लेकर संजौली के शांति विहार और चलौंठी तक करीब 500 मकान स्थित हैं। हाल ही में टनल निर्माण के कारण शांति विहार के लगभग 15 मकानों में दरारें आ गईं, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष और दहशत फैल गई है। लोगों के विरोध को देखते हुए फिलहाल टनल का निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
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विवाद और लोगों की सुरक्षा चिंताओं के बीच नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने प्रभावित क्षेत्रों में 'बिल्डिंग कंडीशन सर्वे' करवाने का फैसला लिया है। एनएचएआई टनल के 100 मीटर के दायरे में आने वाले सभी 500 मकानों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करवाकर उनकी वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड रखेगा। इसके अलावा, दरारों के असल कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी (IIT) की टीम से जांच करवाई जा रही है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद दहिया ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के बाद कमजोर और क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत (रेस्टोरेशन) करवाई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि भवन मालिकों को विश्वास में लेने और उनकी पूरी संतुष्टि के बाद ही आगे का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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दूसरी ओर, प्रभावित भवन मालिकों ने अपनी संपत्ति को बचाने के लिए 'फोरलेन ट्वीन टनल प्रभावित संघर्ष समिति' का गठन कर लिया है। समिति, स्थानीय पार्षदों और निवासियों की स्पष्ट मांग है कि वर्तमान एलाइनमेंट पर टनल का निर्माण हमेशा के लिए बंद किया जाए और पुराने सर्वे के आधार पर ही फोरलेन बनाया जाए। लोगों के इस भारी विरोध के बीच पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी ने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनीं। मंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया है कि इस समस्या के समाधान के लिए जल्द ही संघर्ष समिति के सदस्यों की मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ बैठक करवाई जाएगी।