शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित ऐतिहासिक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (राष्ट्रपति निवास) में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक नया मंच मिला है। प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने आज संस्थान में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा का अनावरण किया और 'कांगड़ा कलम आर्ट गैलरी' का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में नए जिले बनाने की राज्य सरकार की कवायद पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए छोटी प्रशासनिक इकाइयों का समर्थन किया।
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हिमालयी संस्कृति को करीब से जानने का मिलेगा अवसर
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि कांगड़ा कलम आर्ट गैलरी में प्रदर्शित पहाड़ी लघु चित्रकला हमारी सभ्यता और संस्कृति का अहम हिस्सा है। उन्होंने कांगड़ा कला को सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की पहाड़ी पट्टी की संस्कृति में गहरी समानताएं हैं। हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों ने इन क्षेत्रों की विरासत को एक सूत्र में पिरोया है।
इस आर्ट गैलरी में पुरातन और आधुनिक कला का बेहतरीन संगम देखने को मिलेगा। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और शोधार्थियों को हिमालयी क्षेत्र की परंपराओं को करीब से जानने और समझने का अवसर प्राप्त होगा। राज्यपाल ने इस पारंपरिक कला को सहेजने और उसे जीवित रखने वाले कलाकारों के प्रयासों की सराहना की और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
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नए जिलों के गठन पर राज्यपाल की बेबाक राय
वहीं, प्रदेश में जिलों के विस्तार को लेकर राज्य सरकार द्वारा कमेटी बनाए जाने के सवाल पर भी राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर सोच-समझकर ही काम करती है। इसके पीछे के विस्तृत कारण आने वाले समय में स्पष्ट होंगे, लेकिन बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर छोटी प्रशासनिक इकाइयां बनाना अक्सर फायदेमंद साबित होता है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि छोटे जिलों से लोगों को अपने प्रशासनिक कार्य करवाने में सहूलियत मिलती है और सरकारी सुविधाएं आम जन तक आसानी से पहुंचती हैं।
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