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तिजोरियों में कैद सोने पर सरकार की नजर! गोल्ड इम्पोर्ट रोकने की तैयारी, जल्द आ सकती है नई Gold Monetization Scheme - पढ़ें पूरी खबर..

May 13, 2026 11:28 AM
Om Prakash Thakur

भारत के घरों में 'डेड एसेट' के रूप में पड़े हजारों टन सोने को देश की अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए केंद्र सरकार एक महायोजना तैयार कर रही है। 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' के माध्यम से अब आम नागरिकों को अपने निष्क्रिय सोने को बैंकों में जमा करने के बदले 2.5% से 3% तक सालाना ब्याज कमाने का सुनहरा मौका मिलेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और सोने के भारी-भरकम आयात पर लगाम लगाना है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में ही 72 अरब डॉलर के पार जा चुका है। सरकार की इस पहल से न केवल जमाकर्ताओं की आय बढ़ेगी, बल्कि घरेलू आभूषण निर्माताओं को भी बिना आयात किए कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा। पढ़ें विस्तार से..

भारत के 'डेड गोल्ड' को जगाने की तैयारी: सरकार लाएगी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, घर रखे सोने पर अब मिलेगा ब्याज

नई दिल्ली: भारत में सोने के प्रति अटूट प्रेम और इसकी भारी मांग को देखते हुए केंद्र सरकार एक क्रांतिकारी योजना 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' लाने पर विचार कर रही है। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को बैंकिंग प्रणाली में वापस लाना है। सरकार की इस पहल से न केवल आम जनता को अपने सोने पर कमाई करने का मौका मिलेगा, बल्कि देश के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार को भी सुरक्षित किया जा सकेगा।

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विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता बोझ

देश की अर्थव्यवस्था के लिए सोने का बढ़ता आयात एक बड़ी चुनौती बन गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने लगभग 72 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया है। वर्तमान में देश में सालाना 700 टन से ज्यादा सोने का आयात किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने भी जनता से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी से बचें ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। अनुमान है कि भारतीय घरों में 30, 000 टन से अधिक सोना जमा है, जिसे यदि बाजार में लाया जाए तो आयात की जरूरत काफी कम हो सकती है।

कैसे काम करेगी यह योजना और क्या हैं शर्तें?

सरकार की इस प्रस्तावित स्कीम के तहत ग्राहकों को अपने सोने को बैंक में एक निश्चित अवधि के लिए जमा करना होगा। इसके लिए बैंक में एक विशेष खाता खोलना अनिवार्य होगा, जिसमें कम से कम 10 ग्राम सोना जमा किया जा सकेगा। जमा की अवधि न्यूनतम 1 साल से लेकर अधिकतम 16 साल तक हो सकती है। खास बात यह है कि इस सोने पर जमाकर्ता को सालाना 2.5 से 3 प्रतिशत तक का ब्याज दिया जा सकता है। अवधि पूरी होने पर जमाकर्ता के पास अपनी जमा राशि को गोल्ड बार या नकद के रूप में वापस लेने का विकल्प होगा।

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अर्थव्यवस्था और ज्वेलरी सेक्टर को लाभ

इस स्कीम के लागू होने से सोने की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ घरेलू ज्वेलरी निर्माताओं और निर्यातकों को मिलेगा। सरकार बैंक में जमा इस सोने को ज्वेलरी सेक्टर को देगी, जिससे उन्हें नया सोना आयात नहीं करना पड़ेगा। जानकारों का दावा है कि यदि इस योजना के तहत मात्र 2000 टन सोना भी जमा हो जाता है, तो भारत को अगले तीन वर्षों तक सोने के आयात की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और सर्राफा बाजार में स्थिरता आएगी।

संभावित जोखिम और सरकारी घाटा

जहाँ यह योजना अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी दिख रही है, वहीं इसके कुछ वित्तीय जोखिम भी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें समय के साथ लगातार बढ़ती रहती हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति लंबी अवधि के लिए सोना जमा करता है, तो मैच्योरिटी के समय सरकार को उसे बढ़ी हुई बाजार दर पर भुगतान करना होगा। यह अंतर सरकार के लिए घाटे का कारण बन सकता है। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आरबीआई (RBI) इस स्कीम के पुराने प्रारूप में संशोधन कर इसे नए सिरे से लागू करने की तैयारी में है। 

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