वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च में हो रहे बदलावों के बीच भारतीय आईटी सेवा कंपनियां जनरेटिव एआई (GenAI) और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने में जुटी हैं। हालिया तिमाही नतीजों और कॉरपोरेट घोषणाओं के बाद कई दिग्गज और मिड-कैप आईटी कंपनियों ने उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थकेयर सेक्टर के ग्राहकों के साथ नई साझेदारियां की हैं।
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पारंपरिक सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस के बजाय अब क्लाइंट्स अपने बिजनेस प्रोसेस को ऑटोमेट करने और डेटा एनालिटिक्स को आधुनिक बनाने पर बजट खर्च कर रहे हैं। भारतीय कंपनियों ने इस बदलाव को भांपते हुए अपने लाखों कर्मचारियों को एआई टूल्स और मशीन लर्निंग में प्रशिक्षित (Upskill) करने का अभियान तेज कर दिया है। इससे कंपनियों की प्रति कर्मचारी उत्पादकता और प्रोजेक्ट डिलीवरी की गति में सुधार हो रहा है।
विदेशी क्लाइंट्स की ओर से विवेकाधीन खर्च (Discretionary Spend) में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जो पिछले कुछ समय से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण रुका हुआ था। ब्याज दरों में स्थिरता और महंगाई के दबाव में कमी आने से पश्चिमी देशों के कॉरपोरेट अपने रुके हुए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू कर रहे हैं।
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घरेलू शेयर बाजार में भी आईटी इंडेक्स में संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में जिन कंपनियों के पास मजबूत एआई-आधारित समाधान और साइबर सुरक्षा की बेहतर तकनीक होगी, वे अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक ऑर्डर बुक (Deal Pipeline) तैयार करने में सफल रहेंगी।
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