हिमाचल में 'सुख की सरकार' का दावा करने वाली व्यवस्था ने अब गरीब मरीजों के जख्मों पर नमक छिड़कने की तैयारी कर ली है। जिन हाथों से सरकार जनता को मुफ्त बिजली और पानी देने का ढिंढोरा पीट रही है, उन्हीं हाथों से अब अस्पताल के बिस्तर और टेस्ट के नाम पर भारी-भरकम वसूली का फरमान जारी किया जा रहा है। IGMC शिमला, जो कभी गरीबों की आखिरी उम्मीद हुआ करता था, अब 'रोगी कल्याण समिति' की आड़ में 'रोगी परेशान समिति' बनता जा रहा है। पढ़ें विस्तार से -
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में अब इलाज करवाना आम जनता के लिए महंगा होने जा रहा है। अस्पताल की रोगी कल्याण समिति (RKS) की 14वीं महत्वपूर्ण बैठक में शुल्कों में वृद्धि करने का एक बड़ा निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अस्पताल के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के नाम पर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी कर ली गई है।
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टेस्ट और सुविधाओं के दामों में वृद्धि का प्रस्ताव
बैठक का सबसे प्रमुख मुद्दा अस्पताल में दी जाने वाली सुविधाओं और विभिन्न प्रकार के टेस्टों की दरों में संशोधन करना रहा। अस्पताल प्रशासन ने प्रस्ताव रखा है कि वर्तमान में चल रहे टेस्टों के शुल्क और स्पेशल वार्ड के प्रतिदिन के किराए में बढ़ोतरी की जाए। समिति का तर्क है कि चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और रसायनों की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिसके चलते पुराने रेट पर सेवाएं देना अब संभव नहीं रह गया है। यह प्रस्ताव अब औपचारिक रूप से राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसकी मंजूरी मिलते ही नई दरें लागू कर दी जाएंगी।
MRI और PET स्कैन की नई दरें तय
महत्वपूर्ण डायग्नोस्टिक सेवाओं की बात करें तो बैठक में एमआरआई (MRI) और पैट स्कैन (PET Scan) की जांच के लिए नई दरों को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि इन दरों को बाजार रेट से कम रखने का दावा किया गया है, लेकिन पिछले शुल्कों के मुकाबले इनमें बदलाव तय है। प्रशासन का कहना है कि इन महंगी मशीनों के रखरखाव (Maintenance) और तकनीकी अपग्रेडेशन के लिए फंड जुटाना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को जांच के लिए निजी सेंटरों का रुख न करना पड़े।
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RKS कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि की सिफारिश
इलाज महंगा करने के साथ-साथ समिति ने अस्पताल के सुचारू संचालन में जुटे RKS कर्मचारियों को बड़ी राहत देने का मन बनाया है। बैठक में कर्मचारियों को छठा वेतनमान (6th Pay Commission) देने का प्रस्ताव पारित किया गया है। साथ ही, जिन कर्मचारियों ने 8 साल का अनुबंध काल पूरा कर लिया है, उन्हें नियमित वेतनमान देने की सिफारिश भी सरकार से की गई है। माना जा रहा है कि इन कर्मचारियों के वेतन पर होने वाले अतिरिक्त खर्च की भरपाई भी मरीजों से लिए जाने वाले बढ़े हुए शुल्कों से की जाएगी।
हिम केयर और आयुष्मान योजना की देनदारियों पर चर्चा
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश की महत्वाकांक्षी 'हिम केयर' और केंद्र की 'आयुष्मान भारत' योजना की लंबित देनदारियों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इन योजनाओं के तहत अस्पतालों के बकाया पैसे का भुगतान करने की प्रक्रिया में है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट की कमी के कारण किसी भी गरीब मरीज के इलाज में बाधा नहीं आने दी जाएगी और सरकार स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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बुनियादी ढांचे और भविष्य की योजनाएं
अंत में, स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि आईजीएमसी में आने वाले मरीजों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जाए। शुल्कों में होने वाली इस बढ़ोतरी से जो अतिरिक्त आय होगी, उसे अस्पताल की स्वच्छता, सुरक्षा और नई तकनीक लाने पर खर्च किया जाएगा। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को ज्यों का त्यों स्वीकार करती है या आम जनता की जेब को देखते हुए इसमें कुछ कटौती करती है।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब इस समिति ने मरीजों को झटका दिया हो। इससे पहले भी IGMC में जो पंजीकरण पर्ची मुफ्त बनती थी, उसका शुल्क इसी समिति की सिफारिश पर 10 रुपये किया गया था, जिस पर सरकार की काफी किरकरी हुई थी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या रोगी कल्याण समिति वास्तव में रोगियों का 'कल्याण' कर रही है या फिर कल्याण समिति की आड़ में सरकार ही अपनी खाली तिजोरी भरने के लिए इस सबके पीछे खड़ी है? क्या यह मान लिया जाए कि चुनावी लाभ के लिए दी जाने वाली मुफ्त सुविधाओं की भरपाई अब लाचार मरीजों के इलाज से की जाएगी? यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार की प्राथमिकता में गरीब का स्वास्थ्य नहीं, बल्कि संसाधनों के नाम पर होने वाली वसूली और व्यापार है।