देवभूमि हिमाचल की शांत वादियों में अब बगावत के सुर गूंजने लगे हैं। 'काले कानून' के रूप में देखे जा रहे UGC के विरोध में उतरी 'स्वर्ण न्याय यात्रा' ने अपने तीसरे दिन एक उग्र जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। महिपाल सिंह मकराना की अगुवाई में कुल्लू से शुरू हुआ भगवा झंडों का यह मार्च अब नगवाईं और टकोली होते हुए औट की ओर कूच कर रहा है। मकराना ने घरों में सोए हुए समाज को सीधी चेतावनी दी है कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के भविष्य और बेटियों की इज्जत बचाने की निर्णायक लड़ाई है। महज एक झूठी शिकायत के आधार पर होनहार छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाली नीतियों के खिलाफ अब सड़कों पर 'UGC रोलबैक' का शंखनाद हो चुका है।
कुल्लू: (HD News); शांत वादियों वाले हिमाचल प्रदेश का सामाजिक पारा इस वक्त उफान पर है। 'काले कानूनों' की बेड़ियों को तोड़ने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उतरी 'स्वर्ण न्याय यात्रा' अब सड़कों पर एक जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में शुरू हुई इस पदयात्रा के तीसरे दिन आज कुल्लू की सड़कों पर भगवा झंडों का सैलाब उमड़ पड़ा। पहाड़ों की खामोशी को चीरते हुए 'UGC रोलबैक' और 'स्वर्ण एकता जिंदाबाद' के नारों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यह समाज अपना हक़ मांगे बिना चुप बैठने वाला नहीं है।

राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के बैनर तले उठी यह बगावत कुल्लू से अपना सफर तय करते हुए नगवाईं और टकोली के रास्ते होते हुए शाम तक औट (Aut) पहुंचने वाली है। यात्रा के बीच से ही एक वीडियो संदेश जारी करते हुए महिपाल सिंह मकराना ने सीधे जनता की रगों में जोश भरने का काम किया है। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा है कि घरों में सोने का वक्त अब खत्म हो चुका है, जो लोग दिन में नहीं जुड़ पाए, वे शाम को औट पहुंचें, क्योंकि यह लड़ाई अब घरों से निकलकर सड़कों पर ही लड़ी जाएगी।

इस उग्र प्रदर्शन के निशाने पर सीधे तौर पर UGC की नीतियां हैं, जिसे इस यात्रा में 'काला कानून' घोषित कर दिया गया है। मकराना ने व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए चेतावनी दी है कि यह रुमित सिंह या महिपाल सिंह की कोई निजी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह समाज की आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के भविष्य को बचाने का महासंग्राम है। उन्होंने उस खौफनाक मंजर की ओर इशारा किया, जहां महज एक झूठी शिकायत के आधार पर किसी भी होनहार और टॉपर छात्र का भविष्य रातों-रात जेल की सलाखों के पीछे दफन किया जा सकता है। मकराना ने साफ कहा कि "आपकी बच्ची की इज्जत और बच्चों का भविष्य दोनों खतरे में हैं, " उनके इन शब्दों ने आंदोलन की आग को और तेज कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश महज कोई इकलौता राज्य नहीं है जहाँ यह चिंगारी भड़की है; मकराना के अनुसार, यह देश का चौथा राज्य है जहाँ उन्होंने इस तरह की जन-जागृति पदयात्रा शुरू की है। 'जय श्री राम', 'जय परशुराम' और 'जय भवानी' के गगनभेदी नारों के बीच जिस तरह लोग इस यात्रा में अपने कदम मिला रहे हैं, वह सत्ता के गलियारों तक एक स्पष्ट संदेश भेज रहा है। यात्रा का यह कड़ा संदेश है कि यदि 70 से 80 प्रतिशत अनभिज्ञ जनता अब भी अपने अधिकारों के प्रति नहीं जागी, तो आने वाले कल की भारी कीमत उनके ही बच्चों को चुकानी पड़ेगी।