अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी आयु का प्रतीक 'करवा चौथ' इस वर्ष 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस बार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर रोहिणी नक्षत्र, परिघ योग, बुधादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग का एक ऐसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जो इस पर्व की आध्यात्मिक महत्ता को कई गुना बढ़ा देता है। सूर्योदय से पहले सरगी के साथ शुरू होने वाला सुहागिनों का यह निर्जला उपवास रात में चंद्र दर्शन और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद ही संपन्न होगा। पढ़ें विस्तार से..

शिमला: ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, 29 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद मृगशिरा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। ग्रहों की इस विशेष स्थिति और चार महायोगों के कारण यह दिन केवल व्रत-पूजन के लिए ही नहीं, बल्कि नए निवेश, आभूषण और वाहन की खरीदारी के लिहाज से भी अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। संकष्टी चतुर्थी का दिन होने के कारण इस पर्व पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना का भी विशेष महत्व है।

व्रत की शुरुआत 28 अक्टूबर की देर रात से ही हो जाएगी। सूर्योदय से पूर्व सुहागिन महिलाएं अपनी सास द्वारा दी गई 'सरगी' (जिसमें सुहाग के वस्त्र, नारियल, सेवई, फल और मेवे शामिल होते हैं) ग्रहण कर निर्जला उपवास का संकल्प लेंगी। शाम के समय (प्रदोष काल मुहूर्त: 05:09 से 07:51 बजे तक) 16 शृंगार कर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और करवा माता की विशेष पूजा की जाएगी और कथा सुनी जाएगी।
इस कठिन निर्जला व्रत का समापन रात 08:56 बजे चंद्रोदय के साथ होगा। महिलाएं छलनी से चंद्रदेव के दर्शन कर उन्हें दूध, शहद, मिश्री और नारियल मिश्रित जल से अर्घ्य अर्पित करेंगी और फिर उसी छलनी से पति के दर्शन कर उनके हाथों से जल ग्रहण कर अपना व्रत पूर्ण करेंगी।

आधुनिकता के इस दौर में भी करवा चौथ का यह पारंपरिक पर्व पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, त्याग, विश्वास और समर्पण की भावना को पूरी तरह जीवंत रखे हुए है। चार शुभ योगों का यह महासंयोग न केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी है, बल्कि यह सुहागिनों के दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का नया अध्याय भी जोड़ेगा।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई करवा चौथ की तिथि, मुहूर्त, शुभ योग और पूजा विधि से जुड़ी सभी जानकारियां पंचांग, ज्योतिषीय आकलनों और सामान्य व धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी विशेष अनुष्ठान, निवेश या मुहूर्त पर अमल करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या योग्य ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।
