ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट को लेकर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब नई वेब सीरीज 'सत्यचक्र' ने एक ताजा और भयंकर सियासी भूचाल ला दिया है। रिलीज के महज 24 घंटे के भीतर ही इस पॉलिटिकल-क्राइम थ्रिलर ने इंटरनेट पर आग लगा दी है। सत्ताधारी दल और कई दक्षिणपंथी संगठनों ने सीरीज के मेकर्स पर एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
विवाद सीरीज के उस खास दृश्य को लेकर है, जिसमें एक भ्रष्ट राजनेता को धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग करते हुए दिखाया गया है। इस सीन के स्क्रीनशॉट्स वायरल होते ही देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। मुंबई और लखनऊ समेत आधा दर्जन शहरों में निर्देशक और लीड एक्टर्स के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। उग्र प्रदर्शनकारियों ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के दफ्तर के बाहर पुतले फूंके हैं और सीरीज को तुरंत बैन करने की सख्त मांग की है।
दूसरी तरफ, बॉलीवुड का एक बड़ा तबका अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Expression) का झंडा उठाकर मेकर्स के समर्थन में उतर आया है। फिल्म बिरादरी के कई दिग्गज निर्देशकों और लेखकों ने सोशल मीडिया पर इस बायकॉट कल्चर की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्रिएटिविटी की हत्या करार दिया है। उनका तर्क है कि वेब सीरीज एक काल्पनिक कहानी है और राजनेताओं को कला को अपने वोट बैंक की राजनीति का मोहरा नहीं बनाना चाहिए।
इस भारी दबाव के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने भी सख्त रुख अपनाते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। हालांकि, इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जितना ज्यादा सीरीज का विरोध हो रहा है, इसकी व्यूअरशिप उतनी ही रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही है। विवादों की इस आंधी ने 'सत्यचक्र' को रातों-रात ब्लॉकबस्टर बना दिया है, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मनोरंजन जगत में 'नेगेटिव पब्लिसिटी' भी कामयाबी का एक तगड़ा हथियार है।