सोलन / शिमला: (HD News); देवभूमि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और अटूट देव आस्था का अद्भुत नजारा आज जिला सोलन के सायरी घाट (सेरीघाट) में देखने को मिलेगा। शिमला से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवधारा वाले देवता के मूल स्थान (मन्दिर) में आज 17 मई 2026, दिन रविवार को वार्षिक 'नई फसल का मेला' बेहद हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर क्षेत्र के किसान और बागवान अपनी नई कृषि उपज का पहला हिस्सा अपने इष्ट देव के चरणों में अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे, जिसके लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

परंपरा और कृतज्ञता का पर्व: नई फसल का पहला भोग :
सायरी घाट स्थित 'धारा वाले देवता' के इस ऐतिहासिक मूल स्थान पर वर्ष में दो बार विशाल मेलों का आयोजन करने की प्राचीन परंपरा है। इनमें से यह 'नई फसल का मेला' किसानों और बागवानों के लिए सबसे विशेष महत्व रखता है। यह मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि धरती मां और अपने इष्ट देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक पावन जरिया है। परंपरा के अनुसार, क्षेत्र के लोग अपनी मेहनत की नई कृषि उपज और फसलों का पहला हिस्सा (चढ़ावा) सबसे पहले अपने आराध्य देवधारा वाले महाराज के चरणों में सादर अर्पित करते हैं। क्षेत्रवासियों की यह अटूट मान्यता है कि ऐसा करने से फसल में बरकत होती है, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव होता है और पूरे साल घर में अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं।
आकर्षण का केंद्र होगी देव-पालकी और मंदिर की भव्य सजावट
मेले के उपलक्ष्य में संपूर्ण मंदिर प्रांगण को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक रोशनी और पारंपरिक ध्वजाओं से दुल्हन की तरह सजाया गया है। इस उत्सव का सबसे मुख्य और अलौकिक आकर्षण देवधारा वाले महाराज का भव्य रथ (पालकी) होगा। जब देवता जी अपने मूल स्थान के गर्भगृह से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देंगे, तो पूरा माहौल 'जय हो धारा वाले देवता की' के जयकारों से गूंज उठेगा। इस दौरान पारंपरिक हिमाचली वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, नगाड़े, शहनाई और करनाल की धुनों पर देव-नृत्य (नाटी) का दृश्य देखने योग्य होगा, जो यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर देगा।

दूर-दूर से उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, समिति ने किए विशेष प्रबंध
चूँकि यह मंदिर शिमला और सोलन दोनों जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र के नजदीक स्थित है, इसलिए यहाँ दोनों जिलों सहित प्रदेश के अन्य दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है। रविवार का दिन होने के कारण नौकरीपेशा लोग और परिवार भी बड़ी संख्या में महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचेंगे। भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पेयजल, वाहनों की पार्किंग, कानून व्यवस्था और दर्शन के लिए सुचारू लाइनों की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष देव-संदेश और आमंत्रण
बैनर के माध्यम से मंदिर समिति और आयोजकों ने सभी भक्तों से इस पावन उत्सव में शामिल होने की अपील की है। समिति की ओर से जारी संदेश में कहा गया है:
"आप सभी श्रद्धालु भाई-बहनों और क्षेत्रवासियों को सूचित किया जाता है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी देवता जी के प्रांगण में नई फसल का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि इस पावन और पवित्र अवसर पर देव दरबार में सपरिवार पधारकर शीश नवाएं, देवता जी का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें। देवधारा वाले महाराज जी की असीम कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।"
यदि आप भी देवभूमि की इस जीवंत संस्कृति, अनूठी लोक परंपरा और अलौकिक आध्यात्मिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो आज रविवार सायरी घाट पहुंचकर देवधारा वाले महाराज के इस भव्य मेले का हिस्सा जरूर बनें और पुण्य के भागीदार बनें।
— धन्यवाद (जय हो धारा वाले देवता की)
