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हिमाचल | सोलन

ऐतिहासिक बाड़ीधार मेले के भव्य आयोजन को लेकर मंदिर समिति ने तैयार किया रोडमैप, व्यवस्थाओं को लेकर लिए कई अहम निर्णय - पढ़ें पूरी खबर..

June 08, 2026 04:27 AM
Om Prakash Thakur

सदियों पुरानी लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता के जीवंत प्रतीक बाड़ीधार मेले को भव्य और अनुशासित रूप देने के लिए बाड़ादेव पांच पांडव मंदिर समिति ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। प्रधान जीत वर्मा की अगुवाई में संपन्न हुई प्रबंधन समिति की बैठक में पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता और सुरक्षा जैसे मूलभूत मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई और क्षेत्रवासियों व पर्यटकों को इस पावन देव-उत्सव में सपरिवार शामिल होने का भावपूर्ण निमंत्रण दिया गया। पढ़ें विस्तार से..

बाड़ीधार (सोलन/हिमाचल प्रदेश): उत्तर भारत के लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था, अद्वितीय लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता के परम केंद्र बाड़ीधार में इस वर्ष का वार्षिक मेला भव्यता और दिव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। आगामी 15 जून 2026 को आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक और पारंपरिक मेले के सफल, सुरक्षित एवं सुचारू संचालन को लेकर 'बाड़ादेव पांच पांडव मंदिर समिति सरयांज (बाड़ीधार)' की एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता मंदिर समिति के प्रधान जीत वर्मा ने की, जबकि समिति के चेयरपर्सन रमेश ठाकुर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बैठक में मंदिर प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों और क्षेत्र के प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया और मेले के सफल संपादन के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई।

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर कड़ा रुख: 14 जून की रात 11 बजे के बाद वाहनों का प्रवेश वर्जित

मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मंदिर समिति ने इस बार यातायात प्रबंधन को लेकर बेहद सख्त और कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि मेले की पूर्व संध्या यानी 14 जून 2026 की रात्रि 11:00 बजे तक ही मंदिर परिसर क्षेत्र के भीतर व्यापारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित सेवादारों के वाहनों को सामान की ढुलाई के लिए प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। इस तय समय-सीमा के बाद मंदिर परिसर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा और किसी भी परिस्थिति में किसी वाहन को भीतर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। समिति ने सभी बाहरी व स्थानीय व्यापारियों से पुरजोर अपील की है कि वे समय रहते बाड़ीधार पहुंचकर अपनी दुकानें और व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लें, ताकि अंतिम समय में किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी या असुविधा की स्थिति पैदा न हो।

धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान: देव-रथों के आगमन और ठहरने के लिए बनाई विशेष योजना

समय-सीमा को कड़ाई से लागू करने के पीछे के तार्किक और धार्मिक कारणों को स्पष्ट करते हुए मंदिर समिति के नीति-निर्माताओं ने बताया कि 14 जून की रात 11:00 बजे के बाद से ही क्षेत्र के विभिन्न गांवों और देव-पीठों से देवी-देवताओं के पारंपरिक रथों का आगमन शुरू हो जाता है। इन देव-रथों के भव्य स्वागत, उनके ठहराव, रात्रि जागरण और अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत आधी रात से ही हो जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और देव-संस्कृति की मर्यादा को देखते हुए यातायात को पूरी तरह नियंत्रित रखना अनिवार्य हो जाता है। यदि उस समय वाहनों की आवाजाही जारी रही, तो देव-प्रस्थान में व्यवधान पड़ सकता है और सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए ही यह कड़ा फैसला लिया गया है।

श्रद्धालु-हित सर्वोपरि: बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता और पेयजल पर विशेष रोडमैप तैयार

बैठक के दूसरे सत्र में मेले की व्यवस्थाओं और प्रबंधन के हर पहलू पर बिंदुवार और विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मंदिर समिति ने एक सुर में यह संकल्प लिया कि मेले का स्वरूप ऐसा होगा जहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु, दूर-दराज से आए व्यापारी और आम आगंतुक को उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलें और किसी को भी किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। मेले के दौरान पूरे परिसर में चौबीस घंटे स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, सुचारू और विस्तृत पार्किंग व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और सुगम यातायात नियंत्रण के लिए वालंटियर्स की तैनाती की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस बार 'स्वच्छ मेला, भव्य मेला' के संकल्प के साथ पूरे मेला क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष सफाई कमेटियों का गठन किया गया है, जो लगातार कूड़े-कचरे के निस्तारण पर नजर रखेंगी।

संस्कृति और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है बाड़ीधार मेला

बैठक के समापन पर अपने विचार साझा करते हुए मंदिर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि बाड़ीधार का यह ऐतिहासिक मेला केवल एक सामान्य धार्मिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह इस संपूर्ण पहाड़ी क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सदियों पुरानी लोक परंपराओं, आपसी भाईचारे, प्रेम और सामाजिक एकता का एक जीवंत और अनुपम प्रतीक है। यह मेला वर्षों से देश-विदेश के श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र रहा है और भौगोलिक दूरियों को मिटाकर भक्तों को एक अटूट आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। समिति का एकमात्र और निस्वार्थ प्रयास यही है कि इस वर्ष भी यह पूरा महाआयोजन पूर्ण श्रद्धा, अलौकिक प्रेम, सौहार्द और कड़े अनुशासन के अनुकरणीय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हो।

प्रशासनिक सहयोग और सपरिवार पधारने का भावपूर्ण निमंत्रण

अंत में, बाड़ादेव पांच पांडव मंदिर समिति सरयांज (बाड़ीधार) ने समस्त क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं और व्यापारियों से विनम्र अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले सभी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन करें। परिसर की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने में अपना बहुमूल्य सहयोग दें तथा देव-परंपराओं व धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान करें। इसके साथ ही, मंदिर समिति ने समस्त देव-प्रेमियों, पर्यटकों और जनता-जनार्दन को आगामी 15 जून 2026 को आयोजित होने वाले इस पावन, अलौकिक और ऐतिहासिक मेले में सपरिवार पधारने का हार्दिक और भावभीना निमंत्रण भेजा है। 

"श्रद्धा, संस्कृति, भाईचारे और लोक परंपराओं का अनुपम संगम — बाड़ीधार मेले (15 जून 2026) में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। आइए, इस ऐतिहासिक आयोजन के सहभागी बनें और अपनी उपस्थिति से इसकी गरिमा और दिव्यता को और अधिक बढ़ाएं।"

 

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