हिमाचल प्रदेश के अर्की विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले राजकीय महाविद्यालय, जयनगर के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के बादल आखिरकार पूरी तरह छंट गए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील यू-टर्न लेते हुए जयनगर कॉलेज सहित प्रदेश के तीन सरकारी कॉलेजों के विलय और उन्हें बंद करने के अपने पुराने फैसले को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Rescind) कर दिया है। सरकार के इस जनहितैषी कदम को सोलन के सूरजपुर वार्ड-02 से जिला परिषद सदस्य शशिकांत शर्मा द्वारा उठाए गए कड़े और तार्किक प्रयासों की एक बड़ी राजनीतिक व सामाजिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। शशिकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री को सौंपे गए अपने विशेष ज्ञापन में यह पुरजोर वकालत की थी कि इस कॉलेज में 80% से अधिक संख्या लड़कियों की है और दुर्गम पहाड़ी रास्ते होने के कारण कॉलेज बंद होने से बेटियों की उच्च शिक्षा पूरी तरह छूट जाएगी। इस जमीनी हकीकत को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाई और उच्च शिक्षा विभाग ने विलय को रद्द करने की नई अधिसूचना जारी कर दी।
सोलन: (HD News); हिमाचल प्रदेश में अर्की विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले राजकीय महाविद्यालय, जयनगर के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के बादल आखिरकार पूरी तरह छंट गए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील यू-टर्न लेते हुए जयनगर कॉलेज सहित प्रदेश के तीन सरकारी कॉलेजों के विलय और उन्हें बंद करने के अपने पुराने फैसले को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Rescind) कर दिया है। सरकार के इस जनहितैषी कदम को सोलन के सूरजपुर वार्ड-02 से जिला परिषद सदस्य शशिकांत शर्मा द्वारा उठाए गए कड़े और तार्किक प्रयासों की एक बड़ी राजनीतिक व सामाजिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

शशिकांत शर्मा के तर्कसंगत ज्ञापन ने हिलाया शासन -
दरअसल, सरकार ने कम छात्र संख्या वाले संस्थानों को तर्कसंगत बनाने के लिए नए मानदंड तय किए थे, जिसके तहत 75 से कम विद्यार्थियों वाले कॉलेजों को बंद या मर्ज किया जाना था। जयनगर कॉलेज में उस समय छात्र संख्या 61 थी, जिसके चलते इस पर भी ताला लटक गया था। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला परिषद सदस्य शशिकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक बेहद भावुक और जमीनी हकीकतों से रूबरू कराता हुआ विस्तृत ज्ञापन सौंपा। शशिकांत, जो खुद इस क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ यहाँ के स्थायी निवासी भी हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष उन भौगोलिक और सामाजिक विसंगतियों को रखा जिन्हें अमूमन फाइलों में नजरअंदाज कर दिया जाता है।
80% लड़कियां पढ़ती हैं: बंद होता कॉलेज तो टूट जाता बेटियों की उच्च शिक्षा का सपना
शशिकांत शर्मा ने अपने ज्ञापन में एक बेहद संवेदनशील आंकड़ा मुख्यमंत्री के सामने रखा कि जयनगर कॉलेज में पढ़ने वाले कुल विद्यार्थियों में से 80% से अधिक संख्या लड़कियों की है। उन्होंने बताया कि यदि यह कॉलेज बंद होता, तो सबसे गहरा आघात बेटियों की शिक्षा पर पड़ता। ग्रामीण परिवेश के रूढ़िवादी व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों को पढ़ाई के लिए 40 से 50 किलोमीटर दूर भेजना मुमकिन नहीं था। ऐसे में यह फैसला सीधे तौर पर लड़कियों के कॉलेज जाने और अपने पैरों पर खड़े होने के सपने को हमेशा के लिए दफन कर देता।

40-50 किमी दूर हैं दूसरे कॉलेज, पैदल रास्तों और दुर्गम रास्तों की थी चुनौती
भौगोलिक परिस्थितियों का खाका खींचते हुए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि जयनगर कॉलेज से नजदीकी बड़े शिक्षण संस्थान—अर्की और बिलासपुर कॉलेज की दूरी लगभग 40 से 50 किलोमीटर है। चूंकि यहाँ की अधिकतर आबादी बेहद कठिन पहाड़ी व दुर्गम गांवों में बसती है, जहाँ यातायात के साधन बेहद सीमित हैं और छात्रों को लंबा सफर पैदल तय करना पड़ता है। ऐसे में दैनिक रूप से इतनी लंबी दूरी तय करके शहर के कॉलेजों तक आना-जाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। जयनगर कॉलेज आसपास की लगभग 20 पंचायतों के सैकड़ों गांवों के लिए उच्च शिक्षा का एकमात्र सहारा और केंद्र बिंदु बना हुआ है।
छात्र संख्या कम होने की असली वजह: भवन की असुविधा और शिक्षकों का टोटा
अक्सर छात्र संख्या कम होने पर कॉलेजों को बंद कर दिया जाता है, लेकिन शशिकांत ने मुख्यमंत्री को इस गिरावट के पीछे की कड़वी सच्चाई से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि शुरुआती सत्रों में यहाँ छात्रों की संख्या 170 से 200 के बीच हुआ करती थी। कॉलेज की अपनी बिल्डिंग न होना (भवन की असुविधा), बुनियादी ढाँचे की कमी और लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों के कारण साल-दर-साल छात्रों का मोहभंग हुआ और संख्या सिमटकर 61 रह गई। उन्होंने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि यदि सरकार कॉलेज के नए भवन का निर्माण कार्य शुरू करवा दे और स्टाफ की कमी दूर कर दे, तो इस कॉलेज में छात्रों की संख्या का आंकड़ा बेहद आसानी से 300 को पार कर जाएगा।

मुख्यमंत्री ने दिखाई संवेदनशीलता, उच्च शिक्षा विभाग ने जारी की नई अधिसूचना
एक जनप्रतिनिधि की इस जमीनी और तार्किक दलील को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू टाल नहीं सके और उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत इस पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए। नतीजतन, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राकेश कंवर की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। इस नए आदेश के तहत 2 जून 2026 के पुराने फैसले को बदलते हुए जयनगर (सोलन), कुकुमसेरी (लाहौल-स्पीति) और रोनहाट (सिरमौर) कॉलेजों के विलय के फैसले को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
इलाके में जश्न, शशिकांत ने जताया आभार:
इस ऐतिहासिक फैसले की अधिसूचना जारी होते ही समूचे अर्की और जयनगर क्षेत्र के छात्रों व अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि अब उन्हें पढ़ाई के लिए 40 से 50 किलोमीटर दूर नहीं भटकना पड़ेगा। मामले के पटाक्षेप पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला परिषद सदस्य शशिकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार; आपके इस जनहितैषी निर्णय से क्षेत्र के विद्यार्थियों को बहुत बड़ी राहत मिली है। इस निर्णय ने यह साबित कर दिया है कि वर्तमान सरकार दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर कितनी गंभीर है, जिसके लिए समूचे क्षेत्र की जनता हमेशा मुख्यमंत्री जी की ऋणी रहेगी।