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हिमाचल | सोलन

हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सोलन की खेल जशली-बरोग बेल्ट में अवैध निर्माण पर लगा लगाम, 6 मंजिल से ऊंची इमारतों पर रोक जारी - पढ़ें पूरी खबर..

July 17, 2026 06:47 AM
ओम प्रकाश ठाकुर

सोलन में देवभूमि का सीना चीरकर खड़ी कर दी गई हैं 10-मंजिला अवैध इमारतें! नियमों की धज्जियां उड़ाकर, बिना अनुमति के पहाड़ों को काटा जा रहा है और बाहरी बिल्डर बेनामी सौदों के जरिए करोड़ों का खेल खेल रहे हैं। लेकिन अब, हिमाचल हाई कोर्ट ने इस कंक्रीट माफिया पर अपना हंटर चला दिया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सोलन की खील-जशली बेल्ट में 6 मंजिल से ऊँची इमारतों का निर्माण अब बिल्कुल नहीं होगा। कोर्ट ने वन विभाग को तुरंत जांच कर, पर्यावरण को हुए नुकसान की रिपोर्ट 1 हफ्ते में सौंपने के आदेश दिए हैं। पढ़ें विस्तार से..

सोलन: (HD News)हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र सोलन को कंक्रीट के अवैध जंगल में धकेलने वाले रसूखदार बिल्डरों और बेनामी जमीनी सौदागरों के खिलाफ प्रदेश के सबसे बड़े न्याय मंदिर यानी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना चाबुक चला दिया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने 'अर्थ हीलर्स फाउंडेशन' द्वारा दायर एक बेहद गंभीर जनहित याचिका (CWPIL No. 77 of 2026) पर त्वरित सुनवाई करते हुए शासन-प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। कोर्ट ने वन विभाग और संबंधित महकमों को कड़ा नोटिस जारी करते हुए महज एक सप्ताह के भीतर जमीनी हकीकत पर विस्तृत जांच कर स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दाखिल करने का फरमान सुनाया है।

6 मंजिल की सीमा तार-तार, नियमों को ताक पर रख खड़ी कर दीं 10-मंजिला इमारतें 

जनहित याचिका में सोलन जिले के खील, जशली, कोरोल, कैंथारी, पडज्ञानी, बड़ोग और कुमारहट्टी जैसे बेहद खूबसूरत और भूगर्भीय रूप से संवेदनशील (Ecologically Sensitive) क्षेत्रों को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। जहाँ हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के तहत इस पूरी बेल्ट में किसी भी सूरत में 6 मंजिल से ऊपर निर्माण करने पर पूर्ण प्रतिबंध है, वहीं रसूखदार बिल्डर माफिया ने नियमों का खुला मखौल उड़ाते हुए बिना किसी स्वीकृत नक्शे और बिना किसी 'स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट' के 10-10 मंजिल ऊंची आसमानी इमारतें खड़ी कर दी हैं। अंधाधुंध हिल कटिंग (पहाड़ों की कटान) और अवैध रूप से किए जा रहे भारी-भरकम कमर्शियल बोरिंग के कारण क्षेत्र के कम से कम तीन गांवों के पारंपरिक जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे स्थानीय जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हो गई है।

धारा 118 को ठेंगा और बेनामी जमीनी साम्राज्य का पर्दाफाश

इस सुनियोजित खेल का सबसे संगीन पहलू हिमाचल प्रदेश किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम (HP Tenancy and Land Reforms Act, 1972) की धारा 118 का खुला उल्लंघन है। याचिकाकर्ता संस्था की अध्यक्ष डॉ. प्रिया सकलानी ने कोर्ट को बताया कि बाहरी राज्यों के अमीर खरीदारों और बिल्डरों को फायदा पहुँचाने के लिए स्थानीय लोगों के नाम पर करोड़ों के बेनामी भूमि सौदे किए गए हैं। इन जमीनों पर धड़ल्ले से फ्लैट्स बनाकर उन्हें अवैध तरीके से बाहरी लोगों को बेचा जा रहा है। यह न केवल राज्य के भूमि कानूनों के साथ खिलवाड़ है, बल्कि हिमाचल के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा डाका है।

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देवभूमि में नशे का अवैध कारोबार और प्रशासनिक उदासीनता

प्रेस वार्ता में अर्थ हीलर्स फाउंडेशन ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि इन कंक्रीट के ढांचों में केवल अवैध निर्माण नहीं हो रहा, बल्कि देवभूमि की मर्यादा को भी तार-तार किया जा रहा है। संस्था का दावा है कि इन अवैध बहुमंजिला इमारतों में बिना किसी पंजीकरण और नियम-कायदों के धड़ल्ले से कमर्शियल होमस्टे चलाए जा रहे हैं, जो धीरे-धीरे अवैध नशे के कारोबार और अनैतिक गतिविधियों के सुरक्षित गढ़ बनते जा रहे हैं। संस्था ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस महा-विनाश के खिलाफ उन्होंने पूर्व में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP), वन विभाग और राजस्व विभाग को लिखित तौर पर साक्ष्य सौंपे थे, लेकिन अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ने अंततः उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर आने को मजबूर कर दिया।

"जान का खतरा है, पर देवभूमि को तबाह होने नहीं देंगे" – कमल दत्त शर्मा

इस लड़ाई की गूंज तब और सनसनीखेज हो गई जब अर्थ हीलर्स फाउंडेशन के सदस्य और विजिलेंस विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी कमल दत्त शर्मा ने माफिया और तंत्र के गठजोड़ पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने मीडिया के सामने बेहद तल्ख लहजे में कहा:

"यह बेनामी जमीनी सौदों का मकड़जाल आज का नहीं है, बल्कि मौजूदा और पूर्व की सभी सरकारों के संरक्षण में यह खेल फलता-फूलता रहा है। जब भी हमारी संस्था ने इस अवैध सिंडिकेट और बेनामी सौदों के खिलाफ आवाज उठाई, रसूखदार बिल्डरों ने हम पर जानलेवा हमले करवाए। आज भी हमारी जान को सीधा और गंभीर खतरा बना हुआ है। लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं; अपनी पवित्र देवभूमि को चंद पैसों की हवस में इस तरह तबाह होते हम मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकते। यह लड़ाई अंजाम तक लड़ी जाएगी।"

हाईकोर्ट का कड़ा आदेश: वन विभाग तुरंत करे भौतिक सत्यापन

माननीय हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए याचिका में संलग्न उन तस्वीरों पर गहरा संज्ञान लिया है, जिनमें पहाड़ों को बेरहमी से नंगा किया गया और अवैध रूप से काटे गए देवदार व अन्य कीमती पेड़ों की लकड़ियों के ढेर साफ दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट ने आदेश जारी किए हैं कि:

  • विशेष टीम का गठन: राजस्व विभाग के प्रधान सचिव तत्काल वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित करें।
  • भौतिक सत्यापन: यह टीम तुरंत प्रभावित स्थलों का दौरा कर पेड़ों के अवैध कटान और पर्यावरण को हुई क्षति का सटीक आकलन कर रिपोर्ट सौंपे।
  • निर्माण पर रोक: सोलन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) अथॉरिटी को कड़ी हिदायत दी गई है कि इस बेल्ट में 6 मंजिल से ऊपर बने किसी भी फ्लैट या इमारत के फिनिशिंग कार्य और नए निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए।

इस ऐतिहासिक जनहित याचिका की अगली निर्णायक सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होनी तय हुई है, जहाँ रसूखदारों के इस काले साम्राज्य पर कानून का अगला हथौड़ा चलने की पूरी उम्मीद है। यह रिपोर्ट उपलब्ध अदालती दस्तावेजों और प्रेस नोट/कॉन्फ्रेंस पर आधारित है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और तथ्यों की अंतिम पुष्टि न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

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