देश के स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर बाडीधार क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुंहर ने हरियाली और प्रकृति संरक्षण की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने सरकारी महकमों के खोखले दावों की पोल खोल कर रख दी है। एक ओर जहां पंचायत के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और घड़याच व लडोग स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों ने धरती का कर्ज चुकाते हुए जनभागीदारी से देवदार और बांन के 1000 पौधे रोपे, वहीं जंगलों को सहेजने का दंभ भरने वाला 'वन विभाग' इस पूरे महाभियान से रहस्यमयी ढंग से नदारद रहा। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र ठाकुर और पंचायत प्रतिनिधियों के विशेष प्रयासों से सफल हुआ यह आयोजन इस बात का कड़ा संदेश है कि पहाड़ के लोग अपनी माटी और पर्यावरण को बचाने के लिए अब किसी लापरवाह सरकारी विभाग के मोहताज नहीं हैं। पढ़ें विस्तार से..
सोलन/कुंहर: स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर जहां एक ओर पूरा देश आजादी के जश्न में सराबोर था, वहीं बाडीधार क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुंहर के ग्रामीणों ने धरती को हरा-भरा करने का एक ऐतिहासिक संकल्प पूरा किया। पंचायत में जनभागीदारी से देवदार और बांन के 1000 पौधे रोपे गए। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण की इस सबसे मजबूत और जमीनी पहल में विभागीय उदासीनता का एक कड़वा सच भी सामने आया। वनीकरण और जंगलों को बचाने के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाला 'वन विभाग' इस पूरे महाभियान से पूरी तरह नदारद रहा, जिसने सरकारी कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

छात्रों और ग्रामीणों ने मोर्चे पर डटकर पेश की मिसाल
इस वृहद पौधरोपण कार्यक्रम में पंचायत के ग्रामीणों के उत्साह ने यह साबित कर दिया कि प्रकृति को बचाने के लिए किसी सरकारी आदेश की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। अभियान की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब सामने आई जब घड़याच और लडोग स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अपने हाथों से देवदार और बांन के पौधे रोपे। नई पीढ़ी की इस सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य के नागरिक अपने पर्यावरण को लेकर बेहद सजग हैं। वन विभाग की गैरमौजूदगी के बावजूद, ग्रामीणों और बच्चों का हौसला रत्ती भर भी कम नहीं हुआ।
अधिवक्ता वीरेंद्र ठाकुर और पंचायत प्रतिनिधियों का रहा विशेष योगदान
कुंहर पंचायत के इस सफल आयोजन के पीछे मजबूत नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा की अहम भूमिका रही। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र ठाकुर और कुंहर पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने इस पौधरोपण को सफल बनाने में अपना विशेष योगदान दिया। उनकी अगुवाई और कुशल रूपरेखा के चलते ही बिना किसी भारी-भरकम सरकारी मशीनरी के, महज जनभागीदारी से 1000 पौधे रोपने का यह बड़ा लक्ष्य तय समय पर पूरा हो सका।

वन विभाग की गैरमौजूदगी ने खोली दावों की पोल
इस पूरे आयोजन का सबसे निराशाजनक और हैरान करने वाला पहलू वन विभाग की कार्यप्रणाली रही। एक तरफ जहां स्थानीय पंचायत, आम जनता, स्कूली बच्चे और बुद्धिजीवी वर्ग अपना समय और ऊर्जा देकर पहाड़ों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, वहीं इस कार्य के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार वन विभाग मौके से गायब था। विभाग की इस रहस्यमयी अनुपस्थिति ने उसके उन तमाम दावों की हवा निकाल दी है, जो फाइलों में हरियाली बढ़ाने के लिए किए जाते हैं।
कुंहर पंचायत ने इस अभियान के जरिए यह कड़ा संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज अब सरकारी महकमों की राह नहीं देखेगा। वन विभाग भले ही इस पुनीत कार्य से किनारा कर गया हो, लेकिन कुंहर के ग्रामीणों और स्कूली बच्चों द्वारा रोपे गए ये 1000 पौधे आने वाले समय में विभाग की उदासीनता और जनता की जीत की गवाही जरूर देंगे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह समाचार स्थानीय संवाददाताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया है। खबर में वन विभाग की कार्यप्रणाली और उनकी अनुपस्थिति को लेकर किए गए दावे स्थानीय जनता और आयोजनकर्ताओं की प्रतिक्रिया पर आधारित हैं। हमारा समाचार संस्थान किसी भी सरकारी विभाग, अधिकारी या व्यक्ति की छवि धूमिल करने का कोई इरादा नहीं रखता है। यदि संबंधित विभाग या अधिकारी इस विषय पर अपना आधिकारिक पक्ष (Version) रखना चाहते हैं, तो वे पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं; उनके पक्ष को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। समाचार में उल्लिखित तथ्यों की शत-प्रतिशत सत्यता के लिए संपादक या प्रकाशक कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।