हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कुसुम बाली बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (CWPIL No. 13 of 2021) के साथ Earth Healers Foundation द्वारा दायर जनहित याचिका (CWPIL No. 77 of 2026) व अन्य संलग्न मामलों की सुनवाई करते हुए नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) विभाग के सचिव और निदेशक को अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर रहने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से कारण स्पष्ट करने को कहा है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का अनुपालन न करने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई क्यों न अमल में लाई जाए। पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने अदालती आदेशों की निरंतर अवहेलना और सुस्त कार्यप्रणाली पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कुसुम बाली बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य से जुड़े जनहित याचिका मामलों (CWPIL No. 13/2021 व अन्य) की सुनवाई करते हुए नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) विभाग की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के सचिव और निदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से तलब करते हुए पूछा है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से अदालती आदेशों की अनुपालना न करने के एवज में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न अमल में लाई जाए।

छह महीने बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं, हलफनामे पर उठाए सवाल
खंडपीठ ने 13 जनवरी 2023 को पारित निर्णय के निर्देशों की अनुपालना के लिए समय बढ़ाने हेतु सरकार द्वारा दायर आवेदन (CMP No. 20827/2026) के साथ संलग्न हलफनामे की समीक्षा की। रिकॉर्ड से सामने आया कि 'सोलन रीजनल प्लान' को 27 जनवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका था। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए दर्ज किया कि राजपत्र में प्रकाशन के छह महीने से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद, सरकार द्वारा दायर हलफनामे में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसके बाद धरातल पर क्या प्रगति हुई। आदेशों के क्रियान्वयन में बरती जा रही इस लंबी देरी पर अदालत ने दो टूक रुख अपनाते हुए दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को हाजिर होने का फरमान सुनाया।

वन क्षेत्रों के निरीक्षण के लिए तीन हफ्ते की मोहलत
इसी मामले के साथ जुड़ी याचिका (CWPIL No. 77/2026) की सुनवाई के दौरान प्रधान सचिव (वन) द्वारा महाधिवक्ता को भेजा गया 13 अगस्त 2026 का पत्र रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया गया। इसके तहत 28 जुलाई 2026 को गठित वरिष्ठ वन अधिकारियों की उच्चस्तरीय कमेटी ने 1 अगस्त 2026 को याचिकाकर्ता व सह-मालिक के इनपुट्स और फील्ड अधिकारियों के समन्वय के साथ विवादित स्थलों का मौका मुआयना किया था। सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि अंतिम व विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए राजस्व और टीसीपी विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी विचार-विमर्श व दस्तावेजों की गहन पड़ताल जरूरी है। अदालत ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीन सप्ताह का समय मंजूर किया।
25 अगस्त को होगी अगली अहम सुनवाई
अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं को आगामी 25 अगस्त 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। अगली तारीख पर प्रशासनिक अधिकारियों को न केवल रीजनल प्लान के क्रियान्वयन का पूरा ब्योरा देना होगा, बल्कि साढ़े तीन साल की लंबी देरी पर अपनी स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी।
