हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पिछले 1089 दिनों से अपने हकों के लिए सड़क पर बैठे दृष्टिबाधितों का सब्र अब पूरी तरह जवाब दे गया है। राज्य सरकार की बेरुखी और खोखले आश्वासनों से त्रस्त होकर दिव्यांग संगठन ने अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। अपनी बची-खुची सुविधाओं को छीने जाने का आरोप लगाते हुए आंदोलनकारियों ने शिमला छोड़ दिल्ली कूच करने का बड़ा ऐलान किया है। न्याय की आस में ये दिव्यांग अब सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास का घेराव करेंगे और जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रीय दिव्यांगता आयोग के समक्ष भी सरकार के इस 'सौतेले व्यवहार' की पोल खोलेंगे - पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); जो आंखें देख नहीं सकतीं, वे पिछले 1089 दिनों से अपने हक की राह ताक रही हैं, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान शायद खुद 'दृष्टिहीन' और 'बधिर' हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पिछले करीब तीन साल से आंदोलनरत दृष्टिबाधित संगठन का सब्र अब पूरी तरह से टूट चुका है। लगातार मिल रहे कोरे आश्वासनों और सरकारी अनदेखी से क्षुब्ध होकर इन दिव्यांगजनों ने अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। इनका अगला पड़ाव अब शिमला नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली होगा, जहां वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास का घेराव करेंगे।

छीनी जा रही हैं सुविधाएं, झूठे आश्वासनों से त्रस्त
संगठन के प्रमुख सदस्य राजेश ठाकुर ने सिस्टम पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों को सड़क पर बैठे हुए 1089 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समाधान तो दूर, उल्टे उन्हें झूठे आश्वासनों के जाल में उलझाया जा रहा है और उनकी बची-खुची सुविधाएं भी छीनी जा रही हैं।
राजेश ठाकुर ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अब सभी दिव्यांगजनों ने लामबंद होकर दिल्ली कूच का फैसला लिया है। अगर राहुल गांधी के आवास के घेराव के बावजूद राज्य सरकार कुंभकर्णी नींद से नहीं जागती है, तो वे सीधे प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय दिव्यांगता आयोग के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा रखेंगे और व्यवस्था के इस 'सौतेले व्यवहार' की पोल खोलेंगे।

क्या हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें?
लंबे समय से सड़क पर डटे इन दिव्यांगजनों की मांगें कोई लग्जरी नहीं, बल्कि उनके सम्मानजनक जीवनयापन की बुनियादी जरूरतें हैं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
विशेष भर्ती: दिव्यांगजनों के लिए चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर तत्काल विशेष भर्ती मेला आयोजित किया जाए।
पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि: महंगाई के इस दौर में मात्र 1700 रुपये की नाकाफी पेंशन को बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
आवास व बीपीएल में जगह: प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और बीपीएल (BPL) सूची में दिव्यांगजनों को बिना किसी शर्त के शामिल किया जाए।
संवेदनशीलता पर उठते सवाल
यह विडंबना ही है कि जिस वर्ग को समाज और सरकार से सबसे अधिक संवेदनशीलता व संरक्षण की दरकार है, उसे अपने जायज हकों के लिए एक हजार से अधिक दिनों तक सड़कों पर धक्के खाने पड़ रहे हैं। राजेश ठाकुर ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें धरातल पर पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। अब देखना यह है कि क्या दिल्ली के दरवाजे पर पहुंचने के बाद इस गूंगी-बहरी व्यवस्था की नींद टूटती है या ये दिव्यांगजन यूं ही सड़कों पर न्याय की गुहार लगाते रहेंगे।