छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे और दशकों तक रोहड़ू को अपना अजेय राजनीतिक किला बनाने वाले स्व. वीरभद्र सिंह को उनके ही घर में भुलाए जाने से प्रदेश की सियासत गर्मा गई है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक दौरे में न तो वीरभद्र सिंह के पोस्टर नजर आए और न ही उनके योगदान को याद किया गया। इस 'सियासी अनदेखी' से आहत पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने पार्टी नेताओं को आईना दिखाते हुए सीधे तौर पर सुक्खू गुट पर निशाना साधा है, जिसने कांग्रेस के भीतर दबी हुई गुटबाजी की चिंगारी को फिर से हवा दे दी है।
शिमला | विशेष राजनीतिक रिपोर्ट | OM PRAKASH THAKUR
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की विरासत और वर्तमान सरकार के बीच की राजनीतिक खींचतान सतह पर आ गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया ऊपरी शिमला (रोहड़ू) दौरे में वीरभद्र सिंह को पूरी तरह से नजरअंदाज किए जाने पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे 'छोटी सोच' करार देते हुए न केवल मुख्यमंत्री पर निशाना साधा, बल्कि स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की खामोशी पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है।

'इतनी जल्दी भुला देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण'
रोहड़ू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रतिभा सिंह ने बिना नाम लिए सीएम सुक्खू पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी ज्यादा समय नहीं बीता है, इसके बावजूद उनके अपने ही गढ़ रोहड़ू में उन्हें इतनी जल्दी भुला दिया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। दौरे के दौरान पूरे क्षेत्र में न तो उनके पोस्टर नजर आए और न ही मंच से उनके योगदान को याद किया गया। प्रतिभा सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रवैया एक बेहद छोटी सोच को दर्शाता है।
'अपनों से है गिला, खुद लगा सकते थे पोस्टर'
प्रतिभा सिंह का गुस्सा सिर्फ नेतृत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों को भी आईना दिखाया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, "औरों से क्या उम्मीद रखनी, अपने ही लोग आगे आते और बोलते कि हम 20 पोस्टर लगा लेते हैं।" उन्होंने एनएसयूआई से जुड़े नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की विचारधारा कभी गुटबाजी या एक-दूसरे को बांटने वाली नहीं रही। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह नाहन या सिरमौर जाती हैं, तो हमेशा हिमाचल के निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार को सम्मान देती हैं, क्योंकि पुरोधाओं का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।

रोहड़ू से रहा है गहरा नाता, लेकिन सुक्खू से हमेशा रहा '36 का आंकड़ा'
वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे और 1990 से 2007 तक रोहड़ू विधानसभा सीट से लगातार चुनाव जीतकर अजेय रहे। उनकी इसी राजनीतिक कर्मभूमि में उनकी अनदेखी ने समर्थकों को आहत किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस विवाद की जड़ें अतीत में हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और स्व. वीरभद्र सिंह के बीच हमेशा '36 का आंकड़ा' रहा। वर्ष 2012 में जब सुक्खू को प्रदेश कांग्रेस की कमान मिली थी, तब वीरभद्र सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया था और दोनों के सियासी मतभेद कई बार सार्वजनिक मंचों पर खुलकर सामने आए थे।
प्रतिभा सिंह के इस ताजा और सीधे हमले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि हिमाचल कांग्रेस के भीतर 'होली लॉज' (वीरभद्र सिंह का आवास) और सुखविंदर सिंह सुक्खू गुट के बीच की राजनीतिक दरारें अभी पूरी तरह से भरी नहीं हैं।