हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन में नेतृत्व और वर्चस्व को लेकर चल रहा लंबा विवाद अब कानूनी तौर पर समाप्त हो गया है। उपपंजीयक (सहकारी सभाएं), शिमला ने सुरेश ठाकुर गुट द्वारा चुनाव परिणामों को दी गई चुनौती को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है और आत्माराम शर्मा को राज्य प्रधान के रूप में वैध करार दिया है। इस कानूनी जीत के बाद एसोसिएशन ने अपना पूरा फोकस पेंशनरों के हकों की लड़ाई पर केंद्रित कर दिया है। संगठन ने नवरात्रों से प्रदेश भर में जिला स्तरीय बैठकें शुरू कर दी हैं और राज्य सरकार से पुरजोर मांग की है कि दिवाली से पहले 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी का एरियर और लंबित डीए (D.A.) की किश्तों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
शिमला: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद का अब अंत हो गया है। उपपंजीयक (Deputy Registrar) सहकारी सभाएं, शिमला ने सुरेश ठाकुर द्वारा दायर की गई याचिका को निरस्त करते हुए आत्माराम शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया है।
एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान आत्माराम शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान हरीश शर्मा और महासचिव हुकम सिंह ठाकुर ने प्रेस नोट और प्रेस वार्ता के माध्यम से बताया कि एसोसिएशन के संविधान के अनुसार प्रदेश स्तरीय चुनाव 6 जुलाई को सुंदरनगर में संपन्न हुए थे। इस चुनाव में 11 जिलों के लगभग 260 डेलिगेट्स ने हिस्सा लिया था, जिसमें आत्माराम शर्मा को राज्य प्रधान चुना गया था।

चुनाव परिणामों की वैधता को सुरेश ठाकुर गुट ने उपपंजीयक के पास चुनौती दी थी, जिसके बाद अंतिम निर्णय आने तक दोनों पक्षों को एसोसिएशन के लेटरपैड का प्रयोग करने पर रोक लगा दी गई थी। उपपंजीयक ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की गहन जांच करने के बाद 3 अक्टूबर 2026 को सुरेश ठाकुर की अपील खारिज कर दी। इसके अतिरिक्त, विरोधी गुट द्वारा आत्माराम शर्मा को शिमला शहर इकाई से निष्कासित करने के फैसले को भी कोर्ट ने असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया है और उन्हें उनके पद पर बहाल कर दिया है।
नवरात्रों में होंगी जिला स्तरीय बैठकें, एरियर और डीए की उठाई मांग
एसोसिएशन के नेताओं ने बताया कि 21 सितम्बर को मुख्यमंत्री द्वारा पेंशनर्स को दी गई राहतों पर चर्चा करने के लिए नवरात्रों के प्रारंभ से ही प्रदेश के सभी जिलों में बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में दीवाली से पूर्व मुख्यमंत्री से शेष मांगों पर विस्तार से चर्चा करने की रणनीति भी तैयार की जाएगी।
एसोसिएशन का कहना है कि मुख्यमंत्री का रुख पेंशनर्स के प्रति सकारात्मक रहा है, जिससे यह आशा है कि सरकार दीवाली से पूर्व 2016 से 2022 के मध्य रिटायर हुए पेंशनर्स को विशेष राहत प्रदान करेगी। पेंशनर्स की प्रमुख लंबित मांगों में 2016 से 2022 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों का लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी का एरियर और लंबित डीए (D.A.) की किश्तों की अदायगी शामिल है।
प्रेस वार्ता में यह भी साझा किया गया कि सरकार द्वारा ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है, जिसके भुगतान के आदेश जारी हो चुके हैं, और पेंडिंग मेडिकल बिल भी क्लियर किए जा रहे हैं। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि सच्चाई की जीत हुई है और वे पेंशनर्स के हकों के लिए सरकार के समक्ष अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार पूरी तरह से हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता और उनके द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट में किए गए दावों व वक्तव्यों पर आधारित है। इसमें उल्लिखित कानूनी फैसले, आरोप और सरकार से की गई मांगें संबंधित पक्ष के अपने तथ्य और विचार हैं। इस खबर का उद्देश्य केवल संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को पाठकों तक पहुंचाना है। किसी भी न्यायिक निर्णय, प्रशासनिक आदेश या अन्य विवादों की अंतिम पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए।