शिमला: रविवार को शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का हर्षोल्लास व पूर्ण धार्मिक आस्था के साथ आगाज हो गया है। राजधानी शिमला के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक कालीबाड़ी मंदिर में पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप 'मां शैलपुत्री' के दर्शनों और विधिवत पूजा-अर्चना के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। पूरे शहर का माहौल माता के जयकारों और भक्तिमय उत्साह से गुंजायमान है।

भक्तिमय माहौल और श्रद्धालुओं का उत्साह
नवरात्रि के प्रथम दिन राजधानी शिमला का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। इस पावन अवसर के मद्देनजर ऐतिहासिक कालीबाड़ी मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक रोशनियों से भव्य रूप में सजाया गया है। रविवार सुबह हुई विशेष मंगला आरती में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर अनुशासित तरीके से मां काली के दर्शन किए और उनके चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार तथा प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
शारदीय नवरात्रि का पौराणिक और धार्मिक महत्व
इस पावन पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कालीबाड़ी मंदिर के पंडित अमलान गोस्वामी ने बताया कि हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में देवी महामाया का 'अकालबोधन' (असमय आह्वान) किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नकारात्मक व दुष्ट शक्तियों के दमन और सृष्टि के सुचारू पालन-पोषण के लिए ही आदिशक्ति का प्रादुर्भाव हुआ था। इसी शाश्वत परंपरा का निर्वहन करते हुए, शारदीय नवरात्रि में देवी शक्ति का विशेष आह्वान कर उनकी सविधि उपासना की जाती है।

कलश स्थापना और शिमला की रक्षक देवी
नवरात्रि के वैदिक अनुष्ठानों की जानकारी देते हुए पंडित गोस्वामी ने स्पष्ट किया कि प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ-साथ 'कलश स्थापना' (घटस्थापना) का विशेष विधान है, जिसे पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया गया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कालीबाड़ी मंदिर की अधिष्ठात्री देवी को शिमला शहर की रक्षक माना जाता है। यही कारण है कि स्थानीय निवासियों की इस मंदिर में अगाध आस्था है, जिसके चलते सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शनों के लिए उमड़ रही है।
सामूहिक कल्याण की भावना और आगामी आयोजन
नवरात्रि के दौरान की जाने वाली यह आराधना केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि तक सीमित नहीं है। पंडित अमलान के अनुसार, मां दुर्गा की यह उपासना पूरे हिमाचल प्रदेश के सर्वकल्याण, रक्षा और खुशहाली की एक सामूहिक प्रार्थना है। मंदिर प्रबंधन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि नवरात्रि के इन पवित्र नौ दिनों तक मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, भव्य आरती और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का निरंतर आयोजन किया जाएगा, ताकि सभी भक्तगण पूर्ण श्रद्धाभाव के साथ माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
