हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तहबाजारियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। पिछले चार महीने से रोजी-रोटी छिनने और नगर निगम की मनमानी कार्रवाई से आक्रोशित इन कारोबारियों ने सीधे सत्ताधारी कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। तहबाजारियों ने तीखा तंज कसते हुए कहा है कि एक तरफ राहुल गांधी दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों के हक़ में आवाज बुलंद करते हैं, वहीं हिमाचल में उन्हीं की कांग्रेस सरकार गरीबों को उजाड़ने का काम कर रही है। भारी-भरकम जुर्माने और निगम कर्मचारियों के कथित दुर्व्यवहार से त्रस्त तहबाजारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों को काले झंडे दिखाने की चेतावनी दे दी है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तहबाजारियों (स्ट्रीट वेंडर्स) और नगर निगम प्रशासन के बीच टकराव गहराता जा रहा है। शहर के लोअर बाजार समेत अन्य क्षेत्रों में कारोबार करने से रोके जाने के विरोध में तहबाजारी यूनियन ने मेयर कार्यालय पहुंचकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और उप महापौर का घेराव किया। यूनियन का आरोप है कि पिछले चार महीने से निगम की निरंतर कार्रवाई के कारण उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी तहबाजारियों के समर्थन में आवाज उठाते हैं, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल में कांग्रेस की ही सरकार उन्हें उजाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो अब तक शांतिपूर्ण रहा यह वर्ग मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के कार्यक्रमों में काले झंडे दिखाकर उग्र विरोध प्रदर्शन करेगा।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आक्रोश नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे भारी भरकम जुर्माने और कर्मचारियों के कथित दुर्व्यवहार को लेकर है। यूनियन का दावा है कि जब्त किए गए सामान को वापस करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और मनमाने तरीके से जुर्माना वसूला जा रहा है। पदाधिकारियों के अनुसार, यदि किसी तहबाजारी का सामान महज एक हजार रुपये का है, तो उसे छुड़ाने के लिए पांच हजार रुपये तक का जुर्माना भरने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, निगम कर्मचारियों पर तहबाजारियों के साथ धक्का-मुक्की करने और हाल ही में एक युवक के बैग से जबरन सामान निकालने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिसकी यूनियन ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

नगर निगम आयुक्त के रवैये पर निराशा जताते हुए यूनियन ने कहा कि वे कई बार अधिकारियों के पास अपनी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय विधायक हरीश जनारथा ने भी जब्त सामान को उचित दर पर लौटाने और कम जुर्माना लगाने का आश्वासन दिया था, जिसका अब तक कोई असर नहीं दिखा है। तहबाजारियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनका जब्त सामान तुरंत वापस किया जाए, जुर्माने के नियमों को स्पष्ट किया जाए और स्थानीय व हिमाचली होने के नाते उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए शहर में उचित व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाए।