शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में स्पेशल एजुकेटर (विशेष शिक्षक) पदों की भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 10 अक्तूबर 2024 को लागू किए गए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को पूरी तरह वैध ठहराते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी पद के लिए भर्ती का तरीका और योग्यता तय करना पूरी तरह से सरकार और नियोक्ता का विशेषाधिकार है।

भर्ती के नियम तय करना राज्य के अधिकार क्षेत्र में
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने पीतांबर दत्त वर्मा व अन्य द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह अहम फैसला दिया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि काडर का गठन, पदनाम, योग्यताएं और भर्ती के तरीके तय करना राज्य के अधिकार में आता है। कोई पद 100 फीसदी सीधी भर्ती से भरा जाना चाहिए या किसी अन्य तरीके से, यह तय करना पूरी तरह विभाग का विशेषाधिकार है।
याचिकाकर्ताओं की मांग: टीजीटी की तर्ज पर मिले बैचवाइज कोटा
याचिकाकर्ताओं (स्पेशल एजुकेटर पद के पात्र उम्मीदवारों) ने 10 अक्तूबर 2024 के भर्ती नियमों को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनकी प्रमुख मांग यह थी कि सामान्य टीजीटी (TGT) भर्ती की तरह स्पेशल एजुकेटर के पदों पर भी 'बैचवाइज भर्ती' का कोटा दिया जाए और इसे पूरी तरह सीधी भर्ती के जरिए न भरा जाए।

सरकार का तर्क और सीधी भर्ती पर कोर्ट की सहमति
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि यह नियम हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग और सभी संबंधित विभागों के साथ गहन परामर्श के बाद बनाया गया है। 100 प्रतिशत सीधी भर्ती का अर्थ है कि प्रत्येक पात्र उम्मीदवार को योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का समान और निष्पक्ष अवसर मिलेगा। अदालत ने सरकार के इस तर्क से सहमति जताते हुए माना कि सीधी भर्ती का नियम किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रक्रिया में भाग लेने से नहीं रोकता, बल्कि सभी को योग्यता के आधार पर अपनी जगह बनाने का निष्पक्ष अवसर देता है।
विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देने की छूट
हाईकोर्ट ने इन नियमों को वैध ठहराते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह राहत दी कि यदि वे चाहें तो अपनी मांगों को लेकर सक्षम प्राधिकारी (संबंधित विभाग) के समक्ष अपना अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत कर सकते हैं।
