इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के आगामी मेगा ऑक्शन से पहले ही फ्रेंचाइजियों के बीच बोर्डरूम वॉर (मैनेजमेंट की जंग) अपने खूंखार चरम पर पहुंच गई है। बीसीसीआई द्वारा हर टीम के पर्स की लिमिट में किए गए भारी-भरकम इजाफे ने इस बार की नीलामी को अब तक का सबसे आक्रामक बाजार बना दिया है। पर्दे के पीछे खिलाड़ियों की खरीद-फरोख्त, अंडर-द-टेबल डील्स और रिटेंशन को लेकर ऐसी सौदेबाजी चल रही है, जो शेयर बाजार के बड़े-बड़े सटोरियों को भी मात दे दे।

सबसे बड़ा बवाल 'राइट टू मैच' (RTM) कार्ड की वापसी और रिटेंशन के बदले हुए नियमों को लेकर मचा है। पुरानी और सफल फ्रेंचाइजियां अपने कोर खिलाड़ियों को बचाने के लिए बीसीसीआई से लगातार लॉबिंग कर रही हैं, जबकि नई और खाली पर्स वाली टीमें बाजार में मौजूद स्टार खिलाड़ियों पर गिद्ध की तरह झपट्टा मारने के लिए बेताब हैं। कई बड़े भारतीय स्टार्स ने भी अपनी मौजूदा टीमों को अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो उन्हें नंबर-वन रिटेंशन का मोटा पैसा मिले, या वे सीधे ऑक्शन पूल में उतरकर अपनी असली कीमत वसूलेंगे।
विदेशी खिलाड़ियों, खास तौर पर ऑस्ट्रेलियाई और इंग्लिश तेज गेंदबाजों ने भी इस बहती गंगा में हाथ धोने की पूरी व्यावसायिक तैयारी कर ली है। उन्होंने अपने बोर्ड्स के जरिए वर्कलोड मैनेजमेंट का ऐसा खेल रचा है कि वे ऑक्शन में तो भारी कीमत वसूलेंगे, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में खेलने की कोई पुख्ता गारंटी नहीं दे रहे हैं। फ्रेंचाइजियों ने विदेशी खिलाड़ियों की इस 'ब्लैकमेलिंग' के खिलाफ अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है और बीसीसीआई से इन 'पार्ट-टाइम' क्रिकेटर्स के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की है।

यह पूरा व्यावसायिक घटनाक्रम इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि क्रिकेट अब केवल एक जेंटलमैन्स गेम नहीं रहा, बल्कि यह अरबों डॉलर का एक बेहद निर्मम और मुनाफे वाला उद्योग बन चुका है। ऑक्शन टेबल पर हथौड़े के नीचे इस बार न केवल खिलाड़ियों की किस्मत, बल्कि कई अरबपति फ्रेंचाइजी मालिकों का अहंकार भी दांव पर होगा। देखना दिलचस्प होगा कि पैसों की इस अंधी बारिश में कौन सा गुमनाम युवा रातों-रात करोड़पति बनता है और किस महंगे दिग्गज का गुरूर सरेआम चकनाचूर होता है।
