हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति के अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार घिरती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दलित संगठनों को चर्चा के लिए लगातार नजरअंदाज किए जाने से समुदाय में भारी आक्रोश भड़क उठा है। गदर फ्रंट, हिमाचल प्रदेश के संयोजक रवि कुमार ने मुख्यमंत्री को सीधा 'खुला पत्र' दागते हुए स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि अंबेडकर जयंती पर किया गया मुख्यमंत्री का अपना ही वादा नहीं निभाया गया और तुरंत बैठक का समय नहीं मिला, तो प्रदेश का पूरा अनुसूचित जाति समुदाय सरकार की इस घोर उपेक्षा और वादाखिलाफी का सार्वजनिक रूप से कड़ा विरोध करेगा। यह खुला पत्र सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और दलितों के प्रति उसकी गंभीरता पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगा रहा है।
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश में सत्ता के गलियारों से अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के गंभीर मुद्दों को लेकर एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। गदर फ्रंट, हिमाचल प्रदेश के संयोजक रवि कुमार ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ तीखा मोर्चा खोलते हुए एक 'खुला पत्र' जारी किया है। संगठन का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) दलित समुदाय की समस्याओं और उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी कर रहा है और बार-बार गुहार लगाने के बावजूद बातचीत के लिए समय नहीं दिया जा रहा है।

'चौड़ा मैदान का वो खोखला आश्वासन'
गदर फ्रंट ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल दागे हैं। जारी किए गए पत्र में 14 अप्रैल 2026 का विशेष रूप से हवाला दिया गया है। संगठन के अनुसार, डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राजधानी के चौड़ा मैदान में मुख्यमंत्री सुक्खू से उनकी व्यक्तिगत मुलाकात हुई थी। उस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं यह भरोसा दिलाया था कि वह इन मुद्दों पर कार्यालय में बैठकर विस्तृत चर्चा करेंगे। लेकिन, महीनों बीत जाने के बाद भी यह आश्वासन महज कोरी बयानबाजी साबित हुआ है। औपचारिक माध्यमों से लगातार संपर्क साधने के बावजूद सीएम कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं आया।

संवैधानिक मूल्यों का हनन और समुदाय की उपेक्षा
इस रवैये को महज एक प्रशासनिक देरी न मानते हुए गदर फ्रंट ने इसे सीधा सामाजिक न्याय पर प्रहार करार दिया है। रवि कुमार ने अपने पत्र में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब प्रदेश का मुखिया ही अपना वादा भूल जाए, तो यह न केवल एक बड़े वर्ग के प्रति घोर उदासीनता है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों पर भी सवालिया निशान लगाता है। फ्रंट ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति के मुद्दे कोई सामान्य औपचारिकता नहीं हैं, जिन्हें फाइलों के नीचे दबा दिया जाए; यह समुदाय के हकों और जमीनी समस्याओं की लड़ाई है, जिसे अब और टाला नहीं जा सकता।

आर-पार के मूड में संगठन: तुरंत समय दें, अन्यथा होगा कड़ा विरोध
सोशल मीडिया पर इस पत्र को सार्वजनिक करते हुए गदर फ्रंट ने सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री तुरंत प्रभाव से बैठक का समय निर्धारित करें और लंबित मुद्दों पर चर्चा करें। चेतावनी दी गई है कि यदि इस खुले पत्र के बाद भी सरकार नींद से नहीं जागी और समय नहीं दिया गया, तो प्रदेश का पूरा अनुसूचित जाति समुदाय सरकार की इस घोर उपेक्षा और उदासीनता को सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा।