शिमला : हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक व्यापारिक विरासत का प्रतीक 'अंतरराष्ट्रीय लवी मेला' एक बार फिर सजने को तैयार है। शिमला जिले के रामपुर बुशहर में इस वर्ष यह भव्य मेला 11 से 14 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। सोमवार को उपायुक्त शिमला और मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष अनुपम कश्यप ने एक उच्च स्तरीय बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया। प्रशासन का पूरा जोर मेले को भव्य, सुरक्षित और पारंपरिक रूप से समृद्ध बनाने पर है।
मनोरंजन का पूरा डोज: बॉलीवुड से लेकर पहाड़ी तराने तक
इस बार मेले में चार शानदार सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित की जाएंगी। इनमें से दो शामें पूरी तरह से हिमाचल की पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति को समर्पित होंगी, जबकि एक शाम बॉलीवुड के नाम और एक पंजाबी संगीत के नाम रहेगी। इसके अलावा आसमान को रोशन करता लेजर शो, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज, कवि सम्मेलन, मिस्टर और मिस बुशहर प्रतियोगिता और स्थानीय व्यंजनों का 'स्वाद महोत्सव' दर्शकों को बांधे रखेगा।

चामुर्थी घोड़े और तिब्बत व्यापार की झलक
लवी मेला सदियों से भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। इस ऐतिहासिक विरासत को जीवंत करते हुए पारंपरिक लवी बाजार सजाया जाएगा। मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 'अश्व प्रदर्शनी' होगी, जिसमें बर्फीले और दुर्गम रास्तों के लिए मशहूर 'चामुर्थी' नस्ल के घोड़े पेश किए जाएंगे। घोड़ों की दौड़ के साथ-साथ हथकरघा, पारंपरिक आभूषण, और ऊनी कपड़ों के बाजार स्थानीय कारोबारियों को एक बड़ा मंच प्रदान करेंगे।
चप्पे-चप्पे पर रहेगी पुलिस की नजर
मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के मुताबिक, यातायात नियंत्रण, पार्किंग और कानून-व्यवस्था के लिए करीब 300 पुलिसकर्मियों की विशेष तैनाती की जाएगी। इसके अलावा, प्रशासन की ओर से नशामुक्ति, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
इस ऐतिहासिक आयोजन से रामपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बड़ा आर्थिक बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
