आज 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है। आज विजयादशमी यानी दशहरा पर्व मनाया जा रहा है, जो बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। शारदीय नवरात्र के समापन के साथ यह पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा, शस्त्र पूजन, शमी पूजन तथा रावण दहन जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में दशहरे की अलग-अलग परंपराएँ देखने को मिलती हैं।
1. आज का पंचांग
आज मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948 तथा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तिथि है। आज नवमी तिथि के बाद दशमी तिथि का आरंभ होगा। दशमी तिथि को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। मंगलवार होने के कारण आज हनुमान जी की आराधना का भी विशेष महत्त्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान श्रीराम, माता दुर्गा और हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।
2. तिथि, नक्षत्र और योग
आज आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि दोपहर के आसपास समाप्त होकर दशमी तिथि में परिवर्तित होगी। दशमी तिथि का धार्मिक महत्त्व विजयादशमी के कारण विशेष है। आज श्रवण नक्षत्र के बाद धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। योग की दृष्टि से आज शूल योग बताया गया है। तिथि, नक्षत्र और योग का सटीक समय पंचांग की गणना तथा स्थान के अनुसार कुछ अलग हो सकता है।

3. सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
शिमला, हिमाचल प्रदेश के स्थानीय समय के अनुसार आज सूर्योदय लगभग सुबह 6:27 बजे तथा सूर्यास्त शाम लगभग 5:45 बजे होने का अनुमान है। चंद्रोदय दोपहर के समय होगा। धार्मिक कार्यों, व्रत और पूजा-पाठ में स्थानीय सूर्योदय तथा तिथि के समय का विशेष महत्त्व होता है। किसी विशेष अनुष्ठान का मुहूर्त तय करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित है।
4. आज के शुभ मुहूर्त
आज विजयादशमी के अवसर पर अपराह्न काल को पारंपरिक रूप से विशेष महत्त्व दिया जाता है। इस अवधि में शमी पूजन, शस्त्र पूजन और विजयादशमी से जुड़े अन्य अनुष्ठान किए जाते हैं। अभिजीत मुहूर्त को भी सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, दशहरा पूजा का सटीक समय दशमी तिथि और स्थानीय अपराह्न काल के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों में समय में अंतर संभव है।

5. आज के अशुभ काल
पारंपरिक हिंदू पंचांग के अनुसार मंगलवार को राहुकाल दोपहर के बाद आता है। इसके अतिरिक्त यमगण्ड और गुलिक काल भी दैनिक पंचांग में देखे जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचा जाता है। हालांकि, पूजा-पाठ, नियमित धार्मिक गतिविधियों और पर्व से जुड़े अनुष्ठानों के नियम स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं।
6. विजयादशमी का धार्मिक महत्त्व
विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। यह पर्व माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए दशहरा केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि सत्य, साहस, मर्यादा और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला पर्व भी है।

7. दशहरे पर पूजा और परंपराएँ
दशहरे के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीराम, माता दुर्गा और अपने आराध्य देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर शमी वृक्ष का पूजन किया जाता है, जबकि परंपरा के अनुसार शस्त्र, औजार और वाहनों की पूजा भी की जाती है। शाम के समय अनेक स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इन परंपराओं का उद्देश्य बुराइयों का त्याग कर सदाचार, संयम और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देना है।
8. हिमाचल प्रदेश में दशहरे का महत्त्व
हिमाचल प्रदेश में दशहरा विभिन्न स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ मनाया जाता है। कुल्लू का अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं की शोभायात्राएँ और पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहते हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंदिरों में पूजा-अर्चना, मेलों और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से इस पर्व को मनाया जाता है।

9. आज का आध्यात्मिक संदेश
विजयादशमी हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। क्रोध, अहंकार, लालच, ईर्ष्या और अन्य बुराइयों पर विजय प्राप्त करना ही इस पर्व की वास्तविक भावना है। भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें अपने जीवन में मर्यादा, विनम्रता, कर्तव्यनिष्ठा और सदाचार अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
आज का शुभ संदेश
भगवान श्रीराम की कृपा और माँ दुर्गा के आशीर्वाद से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का आगमन हो। आपके सभी कार्य शुभ हों और जीवन से नकारात्मकता दूर हो। विजयादशमी का यह पावन पर्व आपके परिवार में खुशहाली, प्रेम और नई ऊर्जा लेकर आए।
आप सभी को विजयादशमी एवं दशहरा पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
जय श्रीराम! जय माता दी! 🙏🚩
डिस्क्लेमर
यह पंचांग धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी है। तिथि, नक्षत्र, योग, सूर्योदय और शुभ-अशुभ मुहूर्त के समय में स्थान तथा पंचांग पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग अथवा योग्य पुरोहित से पुष्टि अवश्य करें।
