Aaj Ka Panchang 22 October 2026: आज गुरुवार, 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखती है। आज के दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग, तिथि, पक्ष, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और भगवान विष्णु की पूजा का महत्व।
तिथि और पक्ष: आज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दोपहर लगभग 2 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन व्रत, पूजा-पाठ, ध्यान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।

आज का विशेष व्रत — पापांकुशा एकादशी: आज पापांकुशा एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने, व्रत रखने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
वार का महत्व: आज गुरुवार है। यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र धारण करना, पीली वस्तुओं का दान करना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और गुरुजनों का सम्मान करना शुभ होता है।

नक्षत्र: आज शतभिषा नक्षत्र रात लगभग 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में शतभिषा नक्षत्र का संबंध शोध, चिंतन, उपचार और गहन अध्ययन से जोड़ा जाता है। शुभ कार्यों के लिए नक्षत्र के साथ तिथि, योग और अन्य पंचांग स्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
योग: आज वृद्धि योग रात लगभग 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद ध्रुव योग प्रारंभ होगा। पारंपरिक ज्योतिष में वृद्धि योग को प्रगति, उन्नति और सकारात्मक प्रयासों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त चुनते समय अन्य पंचांग स्थितियों का विचार भी आवश्यक है।

करण: आज विष्टि करण, जिसे भद्रा भी कहा जाता है, दोपहर लगभग 2 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके बाद बव करण प्रारंभ होगा। पारंपरिक मुहूर्त गणना में विष्टि करण के दौरान कई मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। किसी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान या शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय तय करना उचित रहेगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त: शिमला में आज सूर्योदय सुबह लगभग 6 बजकर 28 मिनट पर और सूर्यास्त शाम लगभग 5 बजकर 42 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय दोपहर लगभग 3 बजकर 21 मिनट पर और चंद्रास्त अगले दिन रात लगभग 2 बजकर 21 मिनट पर होगा। स्थान बदलने पर इन समयों में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

राहुकाल: आज राहुकाल दोपहर लगभग 1 बजकर 29 मिनट से 2 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष की परंपरा में इस अवधि के दौरान नए मांगलिक कार्यों का शुभारंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नियमित दैनिक कार्य, पूजा-पाठ और पहले से चल रहे कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।
अन्य अशुभ समय: आज यमगंड सुबह लगभग 6 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक और गुलिक काल सुबह लगभग 9 बजकर 17 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन अवधियों में महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। अलग-अलग पंचांगों में गणना पद्धति के कारण कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

ब्रह्म मुहूर्त: आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह लगभग 4 बजकर 47 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान, मंत्र जाप, योग, प्राणायाम और आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। सुबह शांत वातावरण में भगवान का स्मरण और सकारात्मक संकल्प लेकर दिन की शुरुआत करना लाभकारी दिनचर्या हो सकती है।
अभिजीत मुहूर्त: आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिष में इसे शुभ समय माना जाता है। महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए इस अवधि पर विचार किया जा सकता है, लेकिन एकादशी व्रत, व्यक्तिगत मुहूर्त और कार्य की प्रकृति को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

गोधूलि मुहूर्त: आज गोधूलि मुहूर्त लगभग शाम 5 बजकर 18 मिनट से 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। यह समय सूर्यास्त के आसपास का होता है और पारंपरिक रूप से संध्यावंदन, दीप प्रज्वलन तथा भगवान की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान घर के मंदिर में दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति की कामना की जा सकती है।
चंद्र राशि: आज चंद्रमा कुंभ राशि में दोपहर लगभग 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इसके बाद मीन राशि में प्रवेश करेगा। ज्योतिषीय परंपरा में कुंभ राशि को विचारशीलता, सामाजिक सरोकार और नए दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है, जबकि मीन राशि को संवेदनशीलता, आध्यात्मिकता और करुणा का प्रतीक माना जाता है।
आज की पूजा और दान: पापांकुशा एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाएं, पीले फूल अर्पित करें और श्रद्धानुसार विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुरूप व्रत का पालन करें।
आज का आध्यात्मिक संदेश: एकादशी का दिन आत्मचिंतन, संयम, सेवा और भक्ति का संदेश देता है। आज अपने विचारों को सकारात्मक रखें, क्रोध और कटु वाणी से बचें तथा जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने का संकल्प लें। सच्ची श्रद्धा के साथ किए गए अच्छे कर्म जीवन में शांति और संतोष का अनुभव कराने में सहायक हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल एवं शुभ मुहूर्त के समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग अथवा विद्वान पंडित से समय की पुष्टि अवश्य करें।