आज 25 अक्टूबर 2026, रविवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी और उसके बाद शरद पूर्णिमा का अत्यंत पावन संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर धरती पर 'अमृत' बरसाता है, जिसके चलते रात में कोजागर पूजा और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। इसके साथ ही आज सर्वार्थ सिद्धि योग और रेवती नक्षत्र का भी शुभ संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त और पूजा का सटीक समय...
तिथि और नक्षत्र
आज सुबह लगभग 11:56 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी, जिसके पश्चात आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि का आरंभ होगा जो 26 अक्टूबर की सुबह तक मान्य रहेगी। शाम 7:22 बजे तक सौम्यता और शुभ कार्यों का प्रतीक रेवती नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद ऊर्जा और नई शुरुआत का सूचक अश्विनी नक्षत्र लगेगा। चंद्रमा शाम तक मीन राशि में गोचर करेंगे और तत्पश्चात मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

योग और करण
आज शाम 5:22 बजे तक प्रसन्नता व सकारात्मकता का प्रतीक हर्षण योग रहेगा, जिसके बाद वज्र योग की शुरुआत होगी। करण की स्थिति के अनुसार सुबह 11:57 बजे तक वणिज करण रहेगा। इसके बाद रात 10:52 बजे तक विष्टि करण (भद्रा) रहेगा, जिसके उपरांत बव करण लगेगा। किसी भी मांगलिक कार्य से पहले भद्रा के समय का विशेष ध्यान रखना उचित है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
हिमाचल प्रदेश के समयानुसार आज सूर्योदय सुबह लगभग 6:36 बजे और सूर्यास्त शाम 5:43 बजे होगा। शरद पूर्णिमा के अवसर पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है, और आज चंद्रोदय का समय शाम 5:00 से 5:15 बजे के बीच रहने की संभावना है।

आज के शुभ मुहूर्त
दैनिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए आज कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। स्नान-ध्यान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 से 5:44 बजे तक रहेगा। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दोपहर 11:48 से 12:33 बजे तक अभिजीत मुहूर्त और शाम 5:03 से 6:34 बजे तक अमृत काल शुभ रहेगा। शाम 7:22 बजे से अगले दिन सुबह तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
अशुभ समय (राहुकाल)
रविवार होने के कारण आज राहुकाल शाम के समय 4:24 बजे से 5:49 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में किसी भी नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

शरद पूर्णिमा और सूर्यदेव की उपासना
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसने की मान्यता है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ रात में खीर को चांदनी में रखने की परंपरा है। रविवार होने के कारण आज स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्यदेव को अर्घ्य देना, गायत्री मंत्र का जाप करना और दान-पुण्य करना सुख, समृद्धि और आत्मबल में वृद्धि करेगा।
नोट: पंचांग के मुहूर्त और समय भौगोलिक स्थान के अनुसार भिन्न हो सकते हैं, अतः अपने शहर के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
