पश्चिम एशिया लगातार सुलग रहा है और अब यह आग एक विनाशकारी महायुद्ध में तब्दील होने की कगार पर है। ईरान ने अपनी कूटनीतिक और सैन्य तैयारियों को तेज करते हुए अमेरिका और इजरायल को सीधा संदेश दे दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि तेहरान कूटनीति के साथ-साथ अपनी सैन्य क्षमता को भी सर्वोच्च स्तर पर तैयार रख रहा है। इसी बीच, ईरान ने युद्ध रोकने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से नाकेबंदी हटाने जैसे बिंदुओं वाला एक 7-दिवसीय कूटनीतिक प्लान भी पेश किया है।
इस भू-राजनीतिक तनाव और बारूद की गंध का सीधा असर इजरायल की आंतरिक राजनीति पर बुरी तरह पड़ रहा है, जहां चुनाव के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता दांव पर लगी है। ताजा चुनावी रुझानों के अनुसार, 70% वोटों की गिनती पूरी होने के बावजूद नेतन्याहू के गुट को स्पष्ट बहुमत हासिल करने में पसीने छूट रहे हैं। इस तगड़े झटके से बौखलाए नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली का गंभीर आरोप लगाकर घरेलू माहौल को और भी अधिक गरमा दिया है।
युद्ध की इस विभीषिका ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को भी गहरे संकट में डाल दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि विदेश मंत्रालय के अनुसार इस संकट में अब तक 22 भारतीयों की जान जा चुकी है, जिनमें 14 नाविक भी शामिल हैं। दुनिया भर की निगाहें अब वाशिंगटन और तेल अवीव की अगली चाल पर टिकी हैं कि क्या वे कूटनीतिक दबाव के आगे झुकेंगे या फिर मिडिल ईस्ट में एक नए और भयानक महायुद्ध का बिगुल फूंका जाएगा।