देश में हार के बाद अक्सर ईवीएम (EVM) पर रोना रोने वाले विपक्षी दलों को हालिया विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों ने करारा आईना दिखा दिया है। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में पुरानी व्यवस्था यानी बैलेट पेपर के जरिए संपन्न हुए इन चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। इन नतीजों ने विपक्ष के उन तमाम दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें हार का ठीकरा हमेशा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर फोड़ा जाता रहा है।
इस सुनहरे मौके को भुनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन पर बेहद तीखा और मारक तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए विपक्ष से सीधा सवाल दागते हुए कहा कि जनता अंदाजा लगाए कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस कितनी सीटें जीतने में कामयाब रही? कर्नाटक जैसी जगह पर, जहां कांग्रेस की राज्य सरकार सत्ता में है, वहां भी बैलेट पेपर से हुए चुनाव में बीजेपी ने चारों सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।
दूसरी तरफ, इन झटकों से बौखलाए विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। वाराणसी और लखनऊ जैसी स्नातक एमएलसी सीटों पर मतगणना के दौरान समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने प्रशासन पर धांधली का आरोप लगाया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे वोट फिक्सिंग करार दिया है, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि चुनावी जीत-हार का पैमाना केवल मशीनें नहीं, बल्कि जनता का वास्तविक समर्थन है।