संयुक्त राज्य अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और चुनाव प्रचार अपने अंतिम व सबसे आक्रामक चरण में पहुंच गया है। इस चुनाव में अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों के गवर्नर पदों के लिए मतदान होना है। यह चुनाव सीधे तौर पर यह तय करेगा कि आने वाले समय में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा।
मुख्य मतदान से पहले हो रही 'अर्ली वोटिंग' (समयपूर्व मतदान) में अमेरिकी मतदाताओं का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2022 के पिछले मध्यावधि चुनाव की तुलना में इस बार मतदान के दिन से पांच दिन पहले तक करीब 10 मिलियन (1 करोड़) से अधिक अमेरिकी नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं। शुरुआती मतदान के रुझानों और सर्वेक्षणों में प्रमुख बैटलग्राउंड राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करती हुई नजर आ रही है।
यह मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक अग्निपरीक्षा (लिटमस टेस्ट) माना जा रहा है। ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक, आर्थिक मुद्दों और महंगाई को लेकर मतदाताओं में नाराजगी के चलते ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। अपनी पार्टी के बेहद करीबी बहुमत को बचाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरी ताकत झोंक दी है; फ्लोरिडा के डेटोना बीच में एक बड़ी रैली को संबोधित करने के बाद वे आयोवा और कंसास में भी ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां कर रहे हैं।
इस चुनावी घमासान के बीच अमेरिकी न्यायपालिका ने भी कुछ कड़े कदम उठाए हैं। एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग (DOJ) को गैर-नागरिकों के मतपत्रों के नाम पर राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को डराने या धमकाने से अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने करदाताओं के पैसे से चलाए जा रहे ट्रंप प्रशासन के तीन विज्ञापनों को भी टीवी और सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया है। वहीं, भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को लुभाने के लिए दोनों ही दलों के उम्मीदवार मंदिरों के दौरे कर रहे हैं और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।