मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर से बड़े सैन्य संघर्ष के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अपने सशस्त्र बलों के वरिष्ठ कमांडरों के साथ एक उच्च स्तरीय आपात बैठक की है। इस बैठक के बाद ईरान ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी जारी की है कि यदि अमेरिका की ओर से ईरान पर किसी भी प्रकार का सैन्य हमला किया जाता है, तो उसका बेहद प्रभावी और बिना किसी भौगोलिक सीमा के (Unrestricted Geographical Response) कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय से जुड़े आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए जारी किए गए बयानों में कहा गया है कि ईरानी सेना किसी भी संभावित अमेरिकी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान का कहना है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो जवाबी कार्रवाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। दूसरी ओर, वाशिंगटन से आ रही खबरों के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बयान दिया है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच इस नई तनातनी ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के देशों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। खाड़ी के अरब देश इस समय कूटनीतिक स्तर पर पूरी कोशिश कर रहे हैं कि युद्ध की आग एक बार फिर से उनकी दहलीज तक न पहुंचे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के साथ युद्ध फिर से शुरू होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शांति और वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने के अब तक के प्रयासों को गहरा झटका लग सकता है।
इसी बीच, मध्य पूर्व के एक अन्य प्रमुख देश इजरायल में भी राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हाल ही में संपन्न हुए बेहद करीबी संसदीय चुनावों में किसी भी एक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है, हालांकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खेमा सबसे अधिक सीटें जीतने की राह पर है। नेतन्याहू जहां अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए चुनाव में धांधली के आरोप लगा रहे हैं, वहीं पूर्व सैन्य जनरल और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट सरकार बनाने के समीकरण तलाशने की जद्दोजहद में जुटे हैं।