संयुक्त राज्य अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के बाद अमेरिकी राजनीति और प्रशासन में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। चुनाव परिणामों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इन चुनावों में जॉर्जिया से डेमोक्रेट उम्मीदवार कीशा लांस बॉटम्स ने जीत दर्ज कर किसी भी अमेरिकी राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनने का इतिहास रचा है।
मध्यावधि चुनावों के बाद अपने प्रशासन के अंतिम दो वर्षों की रणनीति को धार देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कट्टर सहयोगी और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के प्रमुख योजनाकार स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया 'चीफ ऑफ स्टाफ' नियुक्त किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के बहुमत के बीच स्टीफन मिलर की यह नियुक्ति दर्शाती है कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने कार्यकाल के शेष हिस्से में सीमा सुरक्षा और आव्रजन जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख बनाए रखेंगे।

इस बीच, मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष और युद्ध की स्थिति ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया है, हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष जल्द ही समाप्त हो सकता है। उधर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबफ ने भी बयान दिया कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि अमेरिकी नागरिकों ने युद्ध की नीति को नकार दिया है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ा है। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 8.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.66 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 8.3 प्रतिशत गिरकर 88.08 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।