भारत के नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर में कॉरपोरेट घरानों द्वारा बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय (Capex) की घोषणाएं जारी हैं। सोलर मॉड्यूल निर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं (PLI) के तहत निजी क्षेत्र की कंपनियां तेजी से अपने प्लांट्स का विस्तार कर रही हैं।
ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां अपनी पारंपरिक थर्मल क्षमता के साथ-साथ साल 2030 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो को दोगुना करने की दिशा में काम कर रही हैं। इसके लिए घरेलू बैंकों और अंतरराष्ट्रीय ग्रीन बॉन्ड्स के माध्यम से अरबों डॉलर का फंड जुटाया जा रहा है। इस बदलाव से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि देश का आयात बिल भी घटेगा।
दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी बैटरी निर्माण को लेकर ऑटोमोबाइल और पावर कंपनियों के बीच नए संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) सामने आ रहे हैं। राजमार्गों और प्रमुख शहरों में फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क स्थापित करने के लिए निजी कंपनियां सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं में ईवी को अपनाने का भरोसा बढ़ रहा है।
पूंजी बाजार में भी ग्रीन एनर्जी और पावर सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों और आईपीओ (IPO) को निवेशकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) आने वाले दशक में भारतीय उद्योग जगत के लिए सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन साबित होने वाला है।