हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वर्षों से लंबित नौतोड़ के करीब 20 हजार मामलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल कविंदर गुप्ता से इन मामलों पर जल्द फैसला लेने और मंजूरी देने की गुहार लगाई है। नेगी का कहना है कि नौतोड़ की मंजूरी न केवल हजारों परिवारों को जमीन का अधिकार दिलाने में अहम है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और बंजर भूमि को आबाद करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकती है। पढ़ें विस्तार से..
शिमला, HD News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित नौतोड़ के मामलों को लेकर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर गंभीरता दिखाई है। जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल कविंदर गुप्ता से नौतोड़ के लंबित मामलों पर शीघ्र निर्णय लेने और मंजूरी प्रदान करने का आग्रह किया है। मंत्री के अनुसार जनजातीय क्षेत्रों में करीब 20 हजार नौतोड़ के मामले लंबित हैं, जिन पर जल्द फैसला होने से हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि नौतोड़ का प्रावधान जनजातीय क्षेत्रों में ऐसे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास 20 बीघा से कम भूमि है। लंबे समय से इन मामलों के लंबित रहने के कारण पात्र लोगों को अपनी भूमि संबंधी जरूरतों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां और वहां के लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति देखते हुए नौतोड़ मामलों का शीघ्र निपटारा बेहद जरूरी है।

राज्यपाल से जल्द निर्णय का आग्रह
जनजातीय विकास मंत्री ने कहा कि नौतोड़ के मामलों को मंजूरी देने के संबंध में राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद-5 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल कविंदर गुप्ता से आग्रह किया कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए लंबित मामलों के निपटारे की दिशा में जल्द कदम उठाए जाएं।
नेगी ने बताया कि उन्होंने मौजूदा राज्यपाल से इस मुद्दे को लेकर दो बार मुलाकात की है। इससे पहले वह पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भी इस विषय में आठ बार मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा राज्यपाल ने मामले पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है और उन्हें उम्मीद है कि अब इस दिशा में सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।

पूर्व भाजपा सरकार पर साधा निशाना
मंत्री जगत सिंह नेगी ने नौतोड़ मामलों के लंबित रहने को लेकर पूर्व भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार पूर्व सरकार के पूरे कार्यकाल में नौतोड़ का केवल एक मामला स्वीकृत किया गया।
नेगी ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भी इस मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के हजारों लोगों से जुड़े इस विषय पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि नौतोड़ का मामला केवल जमीन के आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय क्षेत्रों में लोगों के भविष्य, आजीविका और वहां की आबादी को बनाए रखने से भी जुड़ा हुआ है।
पलायन रोकने में अहम भूमिका
जगत सिंह नेगी ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों से लगातार होने वाले पलायन को रोकने के लिए नौतोड़ मामलों का निपटारा महत्वपूर्ण है। यदि लोगों को अपने क्षेत्र में जमीन और आजीविका के पर्याप्त अवसर मिलते हैं, तो वे अपने मूल स्थानों पर रहकर खेती-बाड़ी तथा अन्य गतिविधियों से जुड़े रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नौतोड़ की मंजूरी मिलने से लंबे समय से बंजर पड़ी भूमि को उपयोग में लाने में मदद मिलेगी। इससे न केवल लोगों को अपने क्षेत्र में बसने और रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

आंदोलन की स्थिति न बने, जल्द हो समाधान
जनजातीय विकास मंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि लोगों को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने कहा कि नौतोड़ से जुड़े हजारों मामले वर्षों से लंबित हैं और ऐसे में पात्र लोगों में स्वाभाविक रूप से असंतोष पैदा हो रहा है।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि लंबित मामलों का समाधान हो सके और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके।
कुल मिलाकर, करीब 20 हजार लंबित नौतोड़ मामलों का मुद्दा अब एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में प्रमुखता से सामने आया है। सरकार की नजर अब राज्यपाल स्तर पर होने वाले संभावित निर्णय पर टिकी है।