शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने शाहपुर के पूर्व विधायक एवं प्रदेश सरकार में मंत्री रहे दिग्गज नेता विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मनकोटिया के निधन को प्रदेश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
सैन्य सेवा में रहा शौर्यपूर्ण इतिहास
23 नवंबर 1939 को कांगड़ा जिले के तियारा गांव में जन्मे विजय सिंह मनकोटिया का जीवन देश और प्रदेश की सेवा को समर्पित रहा। वर्ष 1960 में उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में प्रवेश लिया, जहां उन्हें उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

उन्होंने 1962 में भारतीय सेना की प्रथम गोरखा राइफल्स में एक अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। अपने सैन्य कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध तथा 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 4 वर्षों तक भूटान में रॉयल भूटान आर्मी के साथ भी अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 1976 में उन्होंने भारतीय सेना से समयपूर्व सेवानिवृत्ति ले ली।
राजनीति में भी छोड़ी अमिट छाप
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद जनसेवा के उद्देश्य से राजनीति में कदम रखने वाले मनकोटिया ने जनता के बीच गहरी पैठ बनाई। वह वर्ष 1982 में पहली बार शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। अपने लंबे और सफल राजनीतिक सफर में वह पांच बार शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे और हिमाचल प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री पद की अहम जिम्मेदारी भी संभाली।

एक लोकप्रिय और मिलनसार व्यक्तित्व
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने शोक संदेश में कहा कि विजय सिंह मनकोटिया एक कद्दावर नेता थे, जिनकी खासियत राजनीति, प्रशासन और समाज सेवा के बीच बेहतरीन संतुलन बनाए रखना था। उनका व्यक्तित्व बेहद मिलनसार था और वे आम जनमानस के बीच काफी लोकप्रिय थे।
पठानिया ने कहा, "प्रदेश ने उनके रूप में एक होनहार तथा कर्तव्यनिष्ठ नेता खोया है, जिसकी भरपाई करना नामुमकिन है।" विधानसभा अध्यक्ष ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
