हिमाचल प्रदेश में दलितों, आदिवासियों और सफाई कर्मचारियों के हकों की आवाज बुलंद करते हुए 'गदर फ्रंट' ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। शिमला जिलाधिकारी के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में प्रदेश में बढ़ते जातिगत भेदभाव को रोकने, कुल बजट का 25.19 प्रतिशत हिस्सा 'एससी उपयोजना' के लिए तय करने और ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सफाई कर्मचारियों को नियमित करने जैसी प्रमुख मांगे उठाई गई हैं। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके संवैधानिक अधिकारों को धरातल पर लागू नहीं किया गया और हालिया उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेश भर में एक उग्र लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। - पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और उचित प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर 'गदर फ्रंट' ने राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। शिमला जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपे गए इस ज्ञापन में जातिगत भेदभाव, बजट आवंटन, रोजगार, भूमि अधिकार और सफाई कर्मचारियों के शोषण जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित ने कहा कि प्रदेश में दलित और आदिवासी समाज के साथ हो रहे कथित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम का सख्ती से पालन होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के प्रावधानों को धरातल पर उतारा जाए।

बजट में 25.19 प्रतिशत हिस्सेदारी और रोजगार की मांग
ज्ञापन में राज्य के कुल वार्षिक बजट का 25.19 प्रतिशत हिस्सा 'अनुसूचित जाति उपयोजना' के तहत निर्धारित करने की प्रमुख मांग रखी गई है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि इस फंड का इस्तेमाल केवल एससी बस्तियों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार पर ही हो। इसके दुरुपयोग या अन्य मदों में ट्रांसफर किए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने और सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की भी वकालत की गई है।
ठेकेदारी प्रथा हो खत्म, नियमित हों सफाई कर्मचारी
सफाई कर्मचारियों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए संगठन ने ठेकेदारी प्रथा को तत्काल समाप्त करने की मांग की है। फ्रंट का कहना है कि वर्षों से कार्यरत सफाई कर्मियों को नियमित किया जाए, उन्हें उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर आवश्यक सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाएं। रवि कुमार ने शिमला नगर निगम द्वारा सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान उनसे 'भविष्य में हड़ताल न करने' संबंधी लिए गए शपथपत्र का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने बताया कि यह मामला राज्य अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

चौपाल, सैंज और चंबा के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञापन में प्रदेश में घटी कुछ हालिया घटनाओं का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया है। इनमें चौपाल पुलिस थाने में एक दलित पुलिसकर्मी के साथ कथित छुआछूत, कुल्लू के सैंज में एक एससी महिला की मौत, और चंबा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान आरक्षण पर प्रस्तुत किए गए कथित आपत्तिजनक नाटक का मामला शामिल है। संगठन ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अन्य प्रमुख मांगें और आंदोलन की चेतावनी
संगठन ने भूमिहीन अनुसूचित जाति परिवारों को जमीन, एससी छात्रों को छात्रवृत्ति व छात्रावास की सुविधा, एससी महिलाओं के लिए कोटे के भीतर विशेष आरक्षण, निजी क्षेत्र एवं सरकारी ठेकों में प्रतिनिधित्व, और राज्य अनुसूचित जाति आयोग को अधिक शक्तियां देने की भी मांग रखी है।

गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इन ज्वलंत मुद्दों पर जल्द कोई प्रभावी कदम नहीं उठाती है, तो संगठन अन्य सामाजिक वर्गों को लामबंद कर पूरे प्रदेश में एक व्यापक लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू करेगा।