हिमाचल प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने में सेंधमारी करने वाले पूर्व पंचायत प्रधानों की अब खैर नहीं है। जनता के पैसे का गबन करने वाले 1, 012 पूर्व प्रधानों पर सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा एक्शन लिया है। पंचायती राज विभाग ने साफ कर दिया है कि या तो 5.12 करोड़ रुपये का बकाया चुकाओ, वरना संपत्तियां सरेआम नीलाम होंगी। मंडी और सिरमौर जिले के प्रधान इस 'लूट' की फेहरिस्त में सबसे आगे हैं। हिमदर्शन समाचार पर पढ़ें, भ्रष्टाचार पर विभाग की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' और जिलावार रिकवरी की पूरी रिपोर्ट...
शिमला/सोलन: सरकारी धन का दुरुपयोग और जनता के पैसे में सेंधमारी करने वाले पूर्व पंचायत प्रधानों पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार होने जा रहा है। पंचायती राज विभाग ने हिमाचल प्रदेश के 1, 012 पूर्व प्रधानों की संपत्तियों को अटैच कर नीलाम करने के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं। इन डिफाल्टर प्रधानों से करीब 5.12 करोड़ रुपये की पुरानी और बड़ी रिकवरी की जानी है। पंचायतों के विशेष ऑडिट में सामने आई भारी अनियमितताओं के बाद इन पूर्व प्रधानों की सीधे तौर पर जिम्मेदारी फिक्स कर दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रधानों ने सारे नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग किया है। शुरुआत में रिकवरी के राडार पर कुल 1, 773 पूर्व प्रधान आए थे, जिनमें से 701 ने कार्रवाई के डर से 76, 09, 664 रुपये सरकारी खजाने में वापस जमा करवा कर अपनी जान छुड़ाई है, लेकिन 1, 012 पूर्व प्रधानों से वसूली अब भी लंबित है। अब विभाग ने तय किया है कि यह वसूली इनकी संपत्तियों से की जाएगी।

सरकार का यह कड़ा रुख इसलिए भी है क्योंकि यह पूरा मामला सीधे तौर पर 14वीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 'ग्रामीण नियोजन समिति' के 22वें प्रतिवेदन से जुड़ा हुआ है। हिमाचल प्रदेश ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासू ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदेश में 1, 012 पूर्व प्रधानों से 5.12 करोड़ रुपये की रिकवरी की जानी है। विभाग ने सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को रिकवरी के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि इस मामले पर तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाए और एक महीने के भीतर रिकवरी की रिपोर्ट मुख्यालय को प्रेषित करें। विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि कोई पूर्व प्रधान वसूली में सहयोग नहीं करेगा, तो उसकी संपत्ति अटैच कर नीलाम की जाएगी। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

विभागीय जानकारी के अनुसार, यदि जिलावार रिकवरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो सिरमौर जिले के 257 पूर्व प्रधानों से सर्वाधिक 1.76 करोड़ रुपये तथा मंडी जिले के सबसे अधिक 323 पूर्व प्रधानों से 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले जाने हैं। इसके अलावा, ऊना जिले के 38 पूर्व प्रधानों से 41.28 लाख रुपये, चम्बा जिले के 82 पूर्व प्रधानों से 52.99 लाख रुपये और हमीरपुर जिले के 128 पूर्व प्रधानों पर 47.82 लाख रुपये की भारी भरकम रिकवरी पेंडिंग है। राजधानी शिमला जिले के 24 पूर्व प्रधानों से 15.98 लाख रुपये तथा सोलन जिले के 53 पूर्व प्रधानों से 15.21 लाख रुपये की रिकवरी की जाएगी। इसी तरह कांगड़ा जिले के 68 पूर्व प्रधानों से 13.30 लाख रुपये, बिलासपुर जिले के 23 पूर्व प्रधानों से 11.64 लाख रुपये और कुल्लू जिले के 5 पूर्व प्रधानों से 10.31 लाख रुपये सरकारी खजाने में वापस लाए जाने हैं। वहीं, जनजातीय जिलों की बात करें तो किन्नौर जिले के 7 पूर्व प्रधानों से 1.54 लाख रुपये तथा लाहौल-स्पीति के 4 पूर्व प्रधानों से 19, 605 रुपये की रिकवरी की जानी है।
