हिमाचल प्रदेश राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 28 सितंबर 2026 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 से 27 सितंबर 2026 तक चले मानसून सीजन ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। इस भयंकर आपदा के दौरान जहाँ 149 लोगों ने प्राकृतिक आपदाओं (जैसे भूस्खलन, डूबने और ऊंचाई से गिरने) में अपनी जान गंवाई, वहीं 220 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो गई है। इसके साथ ही, राज्य को बुनियादी ढांचे और संपत्तियों में कुल 3, 21, 990.19 लाख रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने भारी तबाही मचाई है, जिसकी पुष्टि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट से होती है। 30 जून 2026 से 27 सितंबर 2026 तक की अवधि के दौरान, राज्य को भारी बारिश और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के कारण जान-माल और संपत्ति का व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है। इस भीषण त्रासदी ने पूरे प्रदेश को गहरे आर्थिक और मानवीय संकट में डाल दिया है।

प्राकृतिक आपदाओं और हादसों में जनहानि
इस मानसून सीजन में लोगों को बड़े पैमाने पर अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य में कुल 149 लोगों की मृत्यु हुई है। मृत्यु के कारणों पर गौर करें तो सबसे अधिक 59 मौतें पेड़ या ऊंचाई वाली जगहों (खड़ी चट्टान) से गिरने के कारण दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, भूस्खलन की चपेट में आने से 18, पानी में डूबने से 17, सांप के काटने से 16 और बिजली का करंट लगने से 10 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ सड़क हादसों ने भी राज्य में कहर बरपाया है, जिनमें कुल 220 लोगों की मृत्यु हुई है।
जिलों पर आपदा का गहरा प्रभाव
राज्य के कई जिले इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिनमें शिमला और चंबा की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। शिमला जिले में प्राकृतिक आपदाओं से 23 और सड़क हादसों में सर्वाधिक 33 लोगों की मौत हुई है। चंबा जिले में भी प्राकृतिक कारणों से 22 और सड़क दुर्घटनाओं में 23 लोगों की जान गई है। इसके अलावा, कांगड़ा और मंडी जिलों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण 19-19 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई है। लाहौल और स्पीति (L&S) में प्राकृतिक आपदाओं से 18 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 13 मौतें केवल भूस्खलन के कारण हुईं। सड़क हादसों के मामले में कांगड़ा और सिरमौर जिले भी गंभीर रूप से प्रभावित रहे, जहां दोनों जगह 26-26 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

पशुधन और राज्य की संपत्ति को नुकसान
इंसानी जानों के नुकसान के साथ-साथ बेजुबान जानवरों और राज्य की बुनियादी संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंची है। इस मानसूनी आपदा के दौरान राज्य भर में कुल 580 जानवरों की मौत हुई है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक संपत्तियों को भी भारी आर्थिक चपत लगी है। रिपोर्ट के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे मानसून सीजन में प्रदेश को कुल 3, 21, 990.19 लाख रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
डिस्क्लेमर - यह खबर हिमाचल प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन सेल) और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा जारी "CUMULATIVE LOSS REPORT MONSOON SEASON ON DATED 28.09.2026" के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। मौत और नुकसान के सभी आंकड़े 30 जून 2026 से 27 सितंबर 2026 तक की अवधि के हैं।
