हिमाचल प्रदेश में महंगाई की मार से कराहती जनता को सीमेंट कंपनियों ने एक बार फिर तगड़ा झटका दिया है। आम आदमी के 'अपने घर' के सपने की बुनियाद अब और महंगी हो गई है। आलम यह है कि महज 10 दिन के भीतर कंपनियों ने मुनाफाखोरी करते हुए सीमेंट के दामों में 10 रुपये प्रति बैग का इजाफा कर दिया है। सरकार की खामोशी और कंपनियों की मनमानी के बीच, एक आशियाना खड़ा करना अब आम इंसान के बजट से सीधे तौर पर बाहर होता जा रहा है।
हिमाचल में 'महंगाई का डबल अटैक': 10 दिन में दूसरी बार बढ़े सीमेंट के दाम, आशियाने का सपना हुआ और दूर
शिमला: महंगाई की चौतरफा मार झेल रही हिमाचल की जनता पर सीमेंट कंपनियों ने एक और सीधा चाबुक चलाया है। आम आदमी के लिए अपने सिर पर पक्की छत का सपना अब और भी महंगा हो गया है। मुनाफाखोरी की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 10 दिन के भीतर सीमेंट की कीमतों में 10 रुपये प्रति बैग का भारी उछाल आ गया है। शुक्रवार को कंपनियों ने अचानक प्रति बैग पांच रुपये का इजाफा कर दिया, जबकि अभी 15 सितंबर को ही पांच रुपये की वृद्धि जनता पर थोपी गई थी। यह सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर एक खुला प्रहार है, जिससे निर्माण कार्यों का पूरा बजट ही पटरी से उतर गया है।

बाजार में कंपनियों की मनमानी का आलम यह है कि हर बड़े ब्रांड ने अपने रेट आसमान पर चढ़ा दिए हैं। नई दरों के लागू होने के बाद अब 'एसीसी सुरक्षा' का दाम 415 से छलांग लगाकर 425 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, 'एसीसी गोल्ड' 465 की जगह 475 रुपये और 'बांगड़ सीमेंट' 390 से उछलकर 400 रुपये प्रति बैग बिक रहा है। 'अल्ट्राटेक' सीमेंट भी अब करीब 405 रुपये के भारी-भरकम रेट पर खड़ा है। स्थानीय विक्रेता पवन, रोहित, मनोज और राकेश बताते हैं कि नई कीमतें सीधे कंपनियों की ओर से थोपी जा रही हैं, जिसके अनुसार ही उन्हें बिक्री करनी पड़ रही है। साफ है, कॉर्पोरेट के इस फरमान के आगे हर कोई बेबस है।

कागजों पर भले ही यह प्रति बैग 10 रुपये की बढ़ोतरी मामूली लगे, लेकिन जमीन पर यह आम आदमी की कमर तोड़ने वाला गणित है। एक छोटे से निर्माण कार्य के लिए भी सैकड़ों बैग लगते हैं। अगर किसी व्यक्ति को आज की तारीख में महज 50 बैग सीमेंट खरीदना हो, तो उसे 10 दिन पहले की तुलना में 500 रुपये की अतिरिक्त चपत लगेगी। 100 बैग पर यह फटका सीधे 1, 000 रुपये का बैठेगा। बड़े प्रोजेक्ट्स या पूरा मकान बनाने वालों के लिए तो यह अतिरिक्त खर्च हजारों में जा रहा है। सवाल यह है कि लगातार बेलगाम होती इन सीमेंट कंपनियों की कीमतों पर प्रशासन की कोई लगाम क्यों नहीं है? क्या आम जनता यूं ही इस महंगाई की साइलेंट लूट का शिकार होती रहेगी?

कुल मिलाकर, 10 दिनों के भीतर हुई यह 10 रुपये की मूल्य वृद्धि सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आम आदमी की गाढ़ी कमाई पर सीधा डाका है। मकान बनाने का जो सपना वर्षों की बचत से बुना जाता है, वो अब सीमेंट कंपनियों की बेलगाम मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता की जेब पर चल रही इस 'खुली लूट' पर प्रशासन आखिर कब तक आंखें मूंदे बैठा रहेगा? क्या सरकार आम आदमी को इन कंपनियों की मनमानी के रहमोकरम पर यों ही छोड़ देगी, या फिर इस बेलगाम महंगाई पर कोई ठोस लगाम कसी जाएगी?