चंबा में उपजा 'स्वर्ण विवाद' अब केवल एक मशीन की प्रामाणिकता का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश के आभूषण बाज़ार में वर्चस्व और अस्तित्व की एक गंभीर लड़ाई का रूप ले चुका है। स्थानीय स्वर्णकारों ने सोलन में पंजीकृत 'वर्मा ज्वैलर्स' को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि यह कारोबारी समूह अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु प्रदेश भर में प्रदर्शनियों का जो जाल बिछा रहा है, उसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को भ्रामक 'डिजिटल बाजीगरी' में फंसाकर गुमराह करना है। चंबा के पारंपरिक आभूषण कारोबारियों के अनुसार, इन प्रदर्शनियों की आड़ में पीढ़ियों से अर्जित स्थानीय स्वर्णकारों की साख व प्रतिष्ठा को धूमिल करने और उनके स्थापित कारोबार की जड़ें काटने का एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। ऐसे में यह यक्ष प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि 24 कैरेट सोने को 22 कैरेट बताने वाले इस 'कैरेटोमीटर' के खेल के पीछे का वास्तविक सत्य क्या है - क्या यह वास्तव में उपभोक्ता-जागरूकता है, या फिर बाहरी कारोबारियों द्वारा स्थानीय व्यापारियों के अटूट भरोसे को खंडित करने की कोई सोची-समझी गहरी साज़िश? पढ़ें विस्तार से..
चंबा: (HD News); चंबा शहर में 'सोने की शुद्धता' का एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने स्थानीय स्वर्णकारों और एक ज्वेलरी प्रदर्शनी के आयोजकों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। एक ग्राहक के 24 कैरेट के सोने के कड़े की शुद्धता पर उठी एक शंका ने, देखते ही देखते एक बड़े हंगामे का रूप ले लिया।

विवाद की जड़: कैरेटमीटर की वो रीडिंग
पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक ग्राहक, जिसने स्थानीय जौहरी से 24 कैरेट सोने का कड़ा बनवाया था, उसे जांचने के लिए शहर में लगी एक ज्वेलरी प्रदर्शनी में पहुंच गया। प्रदर्शनी में लगी आधुनिक 'कैरेटमीटर' मशीन ने जब उस कड़े को परखा, तो रीडिंग ने सबको चौंका दिया। मशीन ने कड़े की शुद्धता 92 प्रतिशत, यानी महज़ 22 कैरेट बताई। 24 कैरेट के दावे और 22 कैरेट की इस हकीकत (मशीन के अनुसार) ने विवाद की चिंगारी को हवा दे दी।
स्थानीय स्वर्णकारों का आक्रोश: "मशीन से हुई है छेड़छाड़"
इस घटना की भनक लगते ही स्थानीय स्वर्णकारों का गुस्सा फूट पड़ा। वे लामबंद होकर सीधे प्रदर्शनी स्थल पर जा पहुंचे और आयोजकों पर मशीन के साथ 'टेंपरिंग' (छेड़छाड़) करने का संगीन आरोप मढ़ दिया।
आक्रोशित स्वर्णकारों का दो-टूक कहना है कि आयोजक जानबूझकर इस तरह की हरकतें कर रहे हैं ताकि ग्राहकों को गुमराह किया जा सके और स्थानीय व्यापारियों की साख को बट्टा लगाया जा सके। गुस्से में तमतमाए जौहरियों ने प्रदर्शनी वालों को खुलेआम चेतावनी दी कि वे बोरिया-बिस्तर समेटें और अपने शहर लौट जाएं, क्योंकि चंबा में उनकी कोई जरूरत नहीं है।
स्थानीय जौहरी ने यहां तक दावा किया कि जब उन्होंने उसी कड़े को अपनी लोकल मशीन पर जांचा, तो वह पूरे 24 कैरेट का ही उतरा। स्वर्णकारों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए कहा है कि वे इस पूरे मामले की नापतोल विभाग और बीआईएस (BIS) से निष्पक्ष जांच करवाएंगे।

आयोजकों का पलटवार: "ग्राहक खुद आए, मशीन ने सिर्फ सच बताया"
दूसरी तरफ, प्रदर्शनी के आयोजक भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। प्रदर्शनी के प्रतिनिधि ने साफ किया कि वे पूरे हिमाचल में इस तरह की प्रदर्शनियां लगाते हैं। उनका तर्क सीधा था- "हमने किसी को न्योता नहीं दिया था, ग्राहक खुद अपनी मर्जी से सोना चेक करवाने आए थे।"
वर्मा ज्वैलर्स के एक प्रतिनिधि ने कहा कि मशीन ने जो 92 प्रतिशत की रीडिंग दी, उन्होंने ईमानदारी से वही सच्चाई ग्राहक के सामने रख दी। उन्होंने अपनी मशीन के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है।
परंपरा बनाम तकनीक: आग में तपता विवाद
हंगामे के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद का अंत सोने को जांचने के पारंपरिक तरीकों (जैसे शुद्ध सोने का गर्म होने पर पीला ही रहना) और आधुनिक मशीनों की सत्यता पर एक अंतहीन बहस के रूप में हुआ।
पुलिस के पाले में गेंद
अब यह पूरा मामला पुलिस की चौखट तक पहुंच गया है। चंबा के पुलिस अधीक्षक, विजय सकलानी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कर ली गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस जल्द ही दोनों पक्षों को तलब कर उनके बयान दर्ज करेगी और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
अब देखना यह है कि पुलिस और तकनीकी जांच के बाद इस 'स्वर्ण संग्राम' में किसकी बात '24 कैरेट' खरी उतरती है और किसकी मशीन 'खोटी' साबित होती है।
