दुनिया की सबसे खूबसूरत झीलों में शुमार हिमाचल प्रदेश की चंद्रताल झील इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है। भारी संख्या में पहुंच रहे पर्यटकों और वाहनों से जहां एक ओर स्थानीय पर्यटन कारोबार को बंपर फायदा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इस संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण और ग्लेशियरों के अस्तित्व को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा हो गई हैं। पढ़ें विस्तार से-
पर्यटकों का भारी हुजूम और घंटों लगा जाम
चंद्रताल की मनमोहक वादियों का दीदार करने के लिए इन दिनों देश-दुनिया से पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। पर्यटकों का यह उत्साह 2 अक्तूबर को चरम पर दिखा, जब वाहनों की भारी आवाजाही के कारण चंद्रताल जाने वाले मार्ग पर कई घंटों तक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। आंकड़ों पर गौर करें तो शुक्रवार के दिन ही लगभग 550 वाहन चंद्रताल पहुंचे। इस दौरान 3, 000 से अधिक पर्यटकों ने झील की खूबसूरती का करीब से आनंद लिया और इन प्राकृतिक नजारों को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद किया।

चेकपोस्ट के आंकड़े और स्थानीय कारोबार को संजीवनी
पर्यटकों की इस बढ़ती आमद की पुष्टि पुलिस चेकपोस्ट के आंकड़े भी कर रहे हैं। कोकसर चेकपोस्ट से मिली जानकारी के अनुसार, 2 अक्तूबर को यहां से करीब 350 पर्यटक वाहन गुजरे। वहीं, लोसर चेकपोस्ट से लगभग 620 वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा चंद्रताल की ओर मुड़ गया। पर्यटकों की इस अचानक बढ़ी संख्या का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिल रहा है। होटल, होम-स्टे, टैक्सी संचालकों और पर्यटन से जुड़े अन्य कारोबारियों की आर्थिकी को इस सीजन में बड़ी राहत मिली है।

संवेदनशील पर्यावरण और हिमनदों (ग्लेशियरों) को नुकसान की आशंका
आर्थिक नजरिए से यह पर्यटन बूम भले ही अच्छा माना जा रहा हो, लेकिन पर्यावरणीय दृष्टि से इसने खतरे की घंटी बजा दी है। चंद्रताल क्षेत्र बेहद नाजुक पारिस्थितिकी (Fragile Ecosystem) वाला इलाका है। झील के समीप स्थित सीबी रेंज की पहाड़ियों में कई बड़े हिमनद मौजूद हैं। इस बार अक्तूबर माह में मौसम अपेक्षाकृत गर्म है, उस पर बड़ी संख्या में वाहनों का हिमनदों के इतने करीब पहुंचना और उनसे निकलने वाला प्रदूषण पर्यावरणविदों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है।

वाहनों की संख्या नियंत्रित करने की उठी मांग
लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। पर्यावरण प्रेमी कुंजलाल और दीपक का कहना है कि चंद्रताल की संवेदनशील पारिस्थितिकी को बचाने के लिए यहां आने वाले पर्यटकों और वाहनों की संख्या को तुरंत नियंत्रित करने की जरूरत है। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो भविष्य में इसके बेहद गंभीर और दूरगामी पर्यावरणीय परिणाम सामने आ सकते हैं। दूसरी ओर, कोकसर पुलिस चेकपोस्ट में तैनात एएसआई शाम लाल ने भी हालात की पुष्टि करते हुए बताया कि इन दिनों लाहौल घाटी की ओर आने वाले पर्यटकों की संख्या में अचानक भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।