आम आदमी पार्टी (AAP) ने हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों के चल रहे धरने और बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। AAP के प्रदेश प्रवक्ता राजेश चानना ने कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी पर 'दोहरे मापदंड' अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह दिल्ली में तो सक्रिय दिखते हैं, लेकिन हिमाचल में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे शिक्षकों पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। चानना ने शिक्षा विभाग में 22 हजार खाली पदों, 3500 सिंगल-टीचर स्कूलों और परीक्षा के समय शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाए जाने जैसे गंभीर आंकड़े पेश करते हुए सुक्खू सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। पढ़ें विस्तार से..
शिमला: (HD News); आम आदमी पार्टी (AAP) ने हिमाचल प्रदेश में लचर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के चल रहे धरने को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। AAP के हिमाचल प्रदेश प्रवक्ता राजेश चानना ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दिल्ली में तो बहुत सक्रिय नजर आते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश में अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे शिक्षकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

चानना ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक मुख्य रूप से क्लस्टर सिस्टम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा कि आखिर वह इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं और मुख्यमंत्री या शिक्षा निदेशालय को कोई आदेश क्यों नहीं दे रहे हैं। AAP ने चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दी गई 'हर क्षेत्र में अंग्रेजी माध्यम स्कूल' खोलने की गारंटियों को महज एक छलावा करार दिया और कहा कि आज प्रदेश में इसके उलट शिक्षा संस्थानों को बंद किया जा रहा है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए AAP प्रवक्ता ने हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद गंभीर तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि खुद मुख्यमंत्री ने विधानसभा में माना है कि प्रदेश में कुल एक लाख एक हजार पद खाली हैं, जिनमें से अकेले शिक्षा विभाग में 22 हजार पद रिक्त पड़े हैं। चानना ने दावा किया कि प्रदेश में लगभग 3500 स्कूल ऐसे हैं जो सिर्फ एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, जबकि 150 मिडिल स्कूलों में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जर्जर इमारतों और बिना शिक्षकों वाले इन स्कूलों में बच्चों का भविष्य आखिर किसके भरोसे छोड़ा गया है।

सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए चानना ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर-दिसंबर और निचले क्षेत्रों में फरवरी जैसे पीक परीक्षा के समय में शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर जनगणना की ड्यूटी में लगा दिया गया है। इसके अलावा, विभागीय लालफीताशाही का आलम यह है कि शिक्षा मंत्री द्वारा लगभग 400 टीजीटी (TGT) शिक्षकों के पदों को मंजूरी देने के बावजूद, मुख्यमंत्री कार्यालय में वह फाइल तीन महीने तक लटकी रही। AAP ने इसे कांग्रेस और पूर्व की भाजपा सरकार, दोनों की ही शिक्षा-विरोधी नीतियों का परिणाम बताया।
कांग्रेस सरकार को पंजाब के 'आप' मॉडल से नसीहत लेने की सलाह देते हुए चानना ने कहा कि आम आदमी पार्टी का मुख्य एजेंडा हमेशा से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब में पिछले साढ़े चार सालों में 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' बनाए गए हैं, जहां के सरकारी स्कूलों के बच्चे नीट (NEET) और आईआईटी (IIT) पास कर रहे हैं, तथा वहां शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड और सिंगापुर भेजा जा रहा है। AAP प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो 2027 के चुनावों तक यह आंदोलन जारी रहेगा और कांग्रेस सरकार को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।