शिमला: (HD News); हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक जाखू मंदिर में दशहरे की तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन पर्व का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इन पुतलों को तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश के मेरठ से आए मुस्लिम कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पिछले करीब 20 वर्षों से यह टीम शिमला में दशहरे के लिए पुतले बनाने का काम कर रही है। यह परंपरा आपसी सहयोग, सामाजिक सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब की एक मिसाल के रूप में सामने आती है।
एक महीने की मेहनत से तैयार होते हैं विशाल पुतले
मेरठ निवासी मोहम्मद अजीम पिछले करीब दो दशक से जाखू मंदिर में दशहरे के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार कर रहे हैं। इन दिनों वह अपने साथियों के साथ पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। कारीगरों के अनुसार, विशाल पुतलों को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगता है। इस दौरान उन्हें लगातार मेहनत करनी पड़ती है। पुतलों के निर्माण के दौरान कई बार चोट लगने जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।
इस बार जाखू मंदिर में रावण का पुतला 45 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है, जबकि कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों की ऊंचाई करीब 40-40 फीट रखी गई है। इतने बड़े पुतलों को तैयार करने के लिए कारीगरों को अनुभव, तकनीकी दक्षता और विशेष सावधानी की जरूरत होती है।

शिमला के कई क्षेत्रों में बनाते हैं पुतले
मोहम्मद अजीम ने बताया कि उनकी टीम जाखू मंदिर के अलावा शिमला के सुन्नी, संकटमोचन और अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ जुन्गा में भी दशहरे के लिए पुतले तैयार करती है। इन दिनों कारीगर जाखू मंदिर परिसर में रहकर निर्माण कार्य पूरा करने में जुटे हैं। अजीम के मुताबिक, मंदिर में उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी की जाती है। उन्होंने बताया कि पुतले बनाने का यह काम उनके लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
20 साल में नहीं हुई परेशानी, मिला सहयोग और अपनापन
मोहम्मद अजीम का कहना है कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से शिमला आ रहे हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें कभी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उनके अनुसार, यहां के लोगों से उन्हें सहयोग और अपनापन मिला है। वह अपने साथियों के साथ मिलकर हिंदुओं के प्रमुख त्योहार दशहरे के लिए पुतले तैयार करते हैं।

अजीम ने कहा कि समाज में कुछ लोग आपसी गलतफहमियां और दूरियां पैदा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन लोगों को ऐसी बातों से बचना चाहिए। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करने और आपसी भाईचारे के साथ रहने की अपील की। त्योहारों से मजबूत होता है आपसी सद्भाव
जाखू मंदिर में दशहरे के लिए पुतले तैयार करने वाले मेरठ के मुस्लिम कारीगरों की यह परंपरा बताती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में विभिन्न समुदायों के लोग किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं। करीब दो दशक से जारी यह सिलसिला मेहनत, रोजगार और आपसी सहयोग के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश भी देता है। दशहरे के आयोजन में इन कारीगरों की मेहनत भी पर्व की तैयारियों का एक अहम हिस्सा है।