अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब अफसरों को प्रमोशन पाने के लिए केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने और अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (APAR) में अच्छे नंबर भरने से काम नहीं चलेगा। नई व्यवस्था के तहत, अधिकारियों को अपनी कुर्सी और पदोन्नति बचाने के लिए साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 'भगवद् गीता के उपदेशों' जैसे विषयों की पढ़ाई करनी होगी। 'आईगॉट कर्मयोगी' पोर्टल पर ऑनलाइन कोर्स पूरे करने के बाद होने वाली परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी परीक्षा के अंकों से अधिकारियों की वार्षिक रिपोर्ट और उनके प्रमोशन का भविष्य तय होगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी इस संबंध में सभी अधिकारियों को कड़े आदेश जारी कर दिए हैं। पढ़ें विस्तार से..
शिमला: अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारियों के लिए अब पदोन्नति पाना आसान नहीं होगा। केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने या अपनी वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) में खुद को अच्छे अंक देकर तरक्की पाने का दौर अब खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार के नए फरमान के बाद, अब अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से लेकर अध्यात्म तक की पढ़ाई करनी होगी। नई व्यवस्था के तहत, अधिकारियों को साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 'भगवद् गीता से नेतृत्व के उपदेश' जैसे विषयों का गहराई से अध्ययन करना होगा और इनकी परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद ही उनकी पदोन्नति का रास्ता साफ होगा।

प्रशासनिक कामकाज में दक्षता और आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए अधिकारियों के लिए 'आईगॉट कर्मयोगी' (iGOT Karmayogi) पोर्टल पर ऑनलाइन कोर्स पूरे करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि इस परीक्षा का परिणाम सीधे 'स्पैरो' (SPARROW) पोर्टल के माध्यम से अधिकारी की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) में दर्ज होगा। यानी, यदि कोई अधिकारी इस व्यापक मूल्यांकन परीक्षा को 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास नहीं कर पाता है, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर उसकी पदोन्नति (प्रमोशन) पर पड़ेगा।
भारत सरकार के अवर सचिव गौरव आनंद द्वारा जारी किए गए इन कड़े निर्देशों को हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी सख्ती से लागू कर दिया है। राज्य के कार्मिक विभाग के विशेष सचिव राजीव कुमार ने इस संबंध में सभी अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। नए नियमों के अनुसार, हर स्तर के अधिकारियों के लिए कम से कम छह कोर्स तय किए गए हैं। अधिकारियों को इनमें से कम से कम 50 प्रतिशत कोर्स अनिवार्य रूप से पूरे करने होंगे, जिसके बाद ही परीक्षा देने के लिए पोर्टल खुलेगा। हालांकि, अधिकारियों को राहत देते हुए परीक्षा पास करने के लिए प्रयासों की कोई सीमा नहीं रखी गई है, वे जितनी बार चाहें परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन पास होना अनिवार्य है।

इस नई प्रशिक्षण नीति के तहत अधिकारियों के अनुभव और स्तर के आधार पर अलग-अलग पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। 25 साल से अधिक की सेवा पूरी कर चुके वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को एआई रणनीति (AI Strategy), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और 'भगवद् गीता से नेतृत्व के पाठ' जैसे उच्च स्तरीय विषयों का अध्ययन करना होगा।
वहीं, मध्यम स्तर के अधिकारियों के लिए साइबर रक्षक, शासन के लिए एआई मॉडल और परिवर्तन प्रबंधन (Change Management) जैसे विषय अनिवार्य किए गए हैं। इसके अलावा, निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल कौशल में निपुणता, तनाव प्रबंधन (Stress Management) और सोशल मीडिया के जिम्मेदारी पूर्ण उपयोग जैसे विषयों की पढ़ाई करनी होगी। इस पूरी कवायद का उद्देश्य नौकरशाही को तकनीकी रूप से सक्षम, मानसिक रूप से मजबूत और नेतृत्व क्षमता में अधिक प्रभावी बनाना है।