हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में आयोजित 'हमीर संगम' कार्यक्रम में भाजपा नेताओं के जुटने और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को आमंत्रित न किए जाने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच, विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश में नए जिलों के गठन की कवायद को लेकर सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। शर्मा ने इसे जनता का ध्यान भटकाने वाला 'शगूफा' करार देते हुए कहा कि जिस सरकार के पास सड़कों के गड्ढे भरने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए पैसे नहीं हैं, वह करोड़ों रुपये खर्च कर नए जिले कैसे बनाएगी। उन्होंने सरकार को प्रशासनिक व्यवस्था को तकनीक आधारित (स्मार्ट) बनाने की नसीहत दी है। - पढ़ें विस्तार..
शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में आयोजित ‘हमीर संगम’ कार्यक्रम राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। हजारों छात्रों की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (जो खुद हमीरपुर से संबंध रखते हैं) को आमंत्रित नहीं किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उनके साथ विधायक सुधीर शर्मा, आशीष शर्मा और पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा भी मौजूद रहे, जिसके चलते इस आयोजन को भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

सांसद सिकंदर कुमार की सफाई और आरोपों पर पलटवार
मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने इस आयोजन के लिए हमीरपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन की सराहना की। सीएम को न्योता न मिलने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथियों का चयन पूरी तरह से छात्र संगठन का फैसला था और संभवतः मुख्यमंत्री की उपलब्धता न रही हो। इसके अलावा, उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए खुद पर लगे कथित गलत भर्तियों के आरोपों का भी कड़ाई से खंडन किया।

नए जिलों के गठन को सुधीर शर्मा ने बताया ध्यान भटकाने की चाल
इस दौरान विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश में नए जिलों के गठन के लिए आयोग बनाने की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की कवायद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे जनता का ध्यान भटकाने वाला 'शगूफा' करार देते हुए कहा कि सरकार ने अगले छह महीने तक जनता को उलझाए रखने का नया तरीका ढूंढ लिया है। अब लोग इसी बहस में उलझे रहेंगे कि नया जिला कहां बनेगा और उनका क्षेत्र किस जिले में जाएगा, जबकि प्रदेश की वास्तविक और मूल समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।

आर्थिक संकट का हवाला, स्मार्ट वर्किंग की दी नसीहत
सुधीर शर्मा ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि हिमाचल पहले ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा है। उन्होंने तंज कसा कि जब सरकार के पास सड़कों के गड्ढे भरने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए पैसे नहीं हैं, तो नए जिलों के गठन पर खर्च होने वाले सैकड़ों करोड़ रुपये कहां से आएंगे। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि जिलों की संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को तकनीक आधारित (स्मार्ट वर्किंग) बनाया जाए, ताकि लोगों के काम समयबद्ध तरीके से हो सकें। शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी गारंटियां पूरी करने में नाकाम रही है और इसीलिए नए जिलों की चर्चा से मुख्य मुद्दों से ध्यान मोड़ने की कोशिश कर रही है।