शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बेहद कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुरानी और तकनीकी रूप से खराब मशीनों के कारण यदि मरीजों को गलत जांच रिपोर्ट मिलती है, तो इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राज्य के क्षेत्रीय और जिला अस्पतालों में पिछले 10 से 15 वर्षों से उपयोग में लाई जा रही पुरानी एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की पूरी सूची तैयार कर उन्हें तुरंत बदलने के निर्देश दे दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक के बिना सटीक इलाज संभव नहीं है, इसलिए डायग्नोस्टिक सेक्टर में बुनियादी बदलाव करना अब समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।

इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में लगभग 28 से 30 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ऑटोमेशन लैब स्थापित की जाएंगी। पहले चरण के तहत आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज, चंबा, हमीरपुर और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में इस हाई-टेक लैब की सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे खून और अन्य मेडिकल टेस्ट पूरी सटीकता के साथ हो सकेंगे।

इसके साथ ही, राज्य सरकार ने जॉब ट्रेनी डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों के लिए सेवा शर्तों को अधिक स्पष्ट एवं व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिष्ठित संस्थानों से विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले डॉक्टर प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं दें, जिससे आम जनता को और अधिक सुदृढ़ तथा विश्वसनीय स्वास्थ्य लाभ मिल सके।