कभी देवताओं की भूमि (देवभूमि) के नाम से विख्यात हिमाचल प्रदेश अब धीरे-धीरे, लेकिन खौफनाक तरीके से नशे के क्रूर तस्करों का सबसे बड़ा गढ़ बनता जा रहा है। हालात इतने बेकाबू और भयावह हो चुके हैं कि चंबा जिले के प्रशासन को भारी मन से अपनी 25 ग्राम पंचायतों और नगर निगम के कई वार्डों को आधिकारिक रूप से 'ड्रग रेड जोन' (अति संवेदनशील नशा ग्रस्त क्षेत्र) घोषित करना पड़ा है। यह घोषणा राज्य के माथे पर एक ऐसा कलंक है, जिसे धोना अब आसान नहीं होगा।
चिट्टा (हेरोइन) और चरस के बढ़ते और खतरनाक जाल ने हिमाचल की युवा पीढ़ी की रगों में सीधा जहर घोल दिया है। घर-घर में नशे के ओवरडोज से युवाओं की मौत की चीखें गूंज रही हैं। इसके खिलाफ हिमाचल पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा, आक्रामक और निर्मम प्रहार शुरू कर दिया है। 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत पुलिस की इस धारदार कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और स्थानीय सफेदपोश माफियाओं के खेमे में भारी खलबली और खौफ मच गया है।
इस जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत नूरपुर पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए एक कुख्यात नशा तस्कर की 1.01 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को सीज कर दिया है। इसमें लग्जरी गाड़ियां, आलीशान मकान और बेनामी बैंक खाते शामिल हैं। तस्करों के आर्थिक साम्राज्य को जड़ से उखाड़ने और उनकी कमर तोड़ने की दिशा में यह एक सीधी और धारदार कार्रवाई है। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नशे का व्यापार करने वालों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया जाएगा।
प्रशासन का यह कड़ा प्रहार इस बात की गवाही देता है कि नशे का कैंसर किस हद तक सूबे की जड़ों को जकड़ चुका है। यह वक्त सिर्फ चिंता जताने का नहीं, बल्कि कड़े और निर्मम फैसले लेने का है। अगर समाज, पुलिस और सरकार ने मिलकर इस 'उड़ते हिमाचल' पर लगाम नहीं लगाई, तो हमारी आने वाली नस्लें इस सफेद जहर की हमेशा के लिए भेंट चढ़ जाएंगी और देवभूमि का अस्तित्व सिर्फ किताबों में सिमट कर रह जाएगा।