नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती उसकी विधायी संस्थाओं की प्रभावशीलता पर निर्भर करती है। नई दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की अहम बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने देशभर के विधानमंडलों के लिए एक 'समान मॉडल नियमावली' तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि संसदीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

पठानिया ने स्पष्ट किया कि यद्यपि राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक भिन्नताओं के कारण नियमों में पूरी तरह एकरूपता लाना संभव नहीं है, लेकिन प्रमुख प्रक्रियाओं में समानता लाकर व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है। हिमाचल विधानसभा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सदन में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी सदस्यों को बोलने का पूरा समय दिया जाता है। उनका मानना है कि यदि स्पीकर निपुण हो, तो न्यायालय भी सदन की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करता। इस दौरान उन्होंने विधानमंडलों में एकरूपता लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों को भी ऐतिहासिक बताया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता वाली इस राष्ट्रीय समिति का गठन पिछले वर्ष किया गया था, जिसमें हिमाचल, दिल्ली, नगालैंड, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विधानसभा अध्यक्ष बतौर सदस्य शामिल हैं। बैठक की शुरुआत दिल्ली के विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के स्वागत भाषण से हुई। सभापति सतीश महाना ने मसौदा रिपोर्ट तैयार करने में कुलदीप पठानिया के अनुभव और कुशल मार्गदर्शन की विशेष रूप से प्रशंसा की।
समिति के सदस्य मसौदा रिपोर्ट पर अंतिम विचार-विमर्श के लिए अपनी अगली बैठक महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में करेंगे, जिसके बाद रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी जाएगी। इससे पूर्व, समिति के सभी सदस्यों ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की, जहां सांसद अनुराग ठाकुर भी मौजूद रहे।
