दीपों का महापर्व दीपावली नजदीक आते ही देशभर में धार्मिक उत्साह और तैयारियां तेज हो गई हैं। धनतेरस से शुरू होने वाले दीपोत्सव में नरक चतुर्दशी, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाते हैं। हर पर्व का अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व है। आइए जानते हैं इस वर्ष दीपोत्सव के प्रमुख पर्वों की तिथियां, परंपराएं और धार्मिक महत्व।
देशभर में दीपावली के उत्सव को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष दीपोत्सव का आयोजन 6 नवंबर से 11 नवंबर तक विभिन्न पर्वों के साथ किया जाएगा। धनतेरस के साथ आज से दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। इस दौरान भगवान धन्वंतरि की पूजा, दीपदान, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व मनाए जाएंगे।
धनतेरस के बाद 7 नवंबर को काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान होंगे। वहीं 8 नवंबर को दीपावली, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी।

इसके बाद 9 नवंबर को कार्तिक अमावस्या रहेगी और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट तथा बलि प्रतिपदा का पर्व मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। इस अवसर पर भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाने की परंपरा है।
दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर को भाई दूज के पर्व के साथ होगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। अलग-अलग तिथियों में मनाए जाने वाले इन पर्वों के कारण इस बार दीपोत्सव का धार्मिक उत्साह कई दिनों तक बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: त्योहारों की तिथियां स्थानीय पंचांग, तिथि की गणना और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। पूजा एवं व्रत संबंधी निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।